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ज़बूर 127

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1सुलेमान का ज़ियारत का गीत।

2यह भी अबस है कि तुम सुबह-सवेरे उठो और पूरे दिन मेहनत-मशक़्क़त के साथ रोज़ी कमाकर रात गए सो जाओ। क्योंकि जो अल्लाह को प्यारे हैं उन्हें वह उनकी ज़रूरियात उनके सोते में पूरी कर देता है।

3बच्चे ऐसी नेमत हैं जो हम मीरास में रब से पाते हैं, औलाद एक अज्र है जो वही हमें देता है।

4जवानी में पैदा हुए बेटे सूरमे के हाथ में तीरों की मानिंद हैं।

5मुबारक है वह आदमी जिसका तरकश उनसे भरा है। जब वह शहर के दरवाज़े पर अपने दुश्मनों से झगड़ेगा तो शरमिंदा नहीं होगा।

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ज़बूर 127 — urdu:

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