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ज़बूर 128

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1ज़ियारत का गीत।

2यक़ीनन तू अपनी मेहनत का फल खाएगा। मुबारक हो, क्योंकि तू कामयाब होगा।

3घर में तेरी बीवी अंगूर की फलदार बेल की मानिंद होगी, और तेरे बेटे मेज़ के इर्दगिर्द बैठकर ज़ैतून की ताज़ा शाख़ों इससे मुराद है पैवंदकारी के लिए दरख़्त से काटी गई टहनियाँ। की मानिंद होंगे।

4जो आदमी रब का ख़ौफ़ माने उसे ऐसी ही बरकत मिलेगी।

5रब तुझे कोहे-सिय्यून से बरकत दे। वह करे कि तू जीते-जी यरूशलम की ख़ुशहाली देखे,

6कि तू अपने पोतों-नवासों को भी देखे। इसराईल की सलामती हो!

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ज़बूर 128 — urdu:

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