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ज़बूर 26

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1दाऊद का ज़बूर।

2ऐ रब, मुझे जाँच ले, मुझे आज़माकर दिल की तह तक मेरा मुआयना कर।

3क्योंकि तेरी शफ़क़त मेरी आँखों के सामने रही है, मैं तेरी सच्ची राह पर चलता रहा हूँ।

4न मैं धोकेबाज़ों की मजलिस में बैठता, न चालाक लोगों से रिफ़ाक़त रखता हूँ।

5मुझे शरीरों के इजतिमाओं से नफ़रत है, बेदीनों के साथ मैं बैठता भी नहीं।

6ऐ रब, मैं अपने हाथ धोकर अपनी बेगुनाही का इज़हार करता हूँ। मैं तेरी क़ुरबानगाह के गिर्द फिरकर

7बुलंद आवाज़ से तेरी हम्दो-सना करता, तेरे तमाम मोजिज़ात का एलान करता हूँ।

8ऐ रब, तेरी सुकूनतगाह मुझे प्यारी है, जिस जगह तेरा जलाल ठहरता है वह मुझे अज़ीज़ है।

9मेरी जान को मुझसे छीनकर मुझे गुनाहगारों में शामिल न कर! मेरी ज़िंदगी को मिटाकर मुझे ख़ूनख़ारों में शुमार न कर,

10ऐसे लोगों में जिनके हाथ शर्मनाक हरकतों से आलूदा हैं, जो हर वक़्त रिश्वत खाते हैं।

11क्योंकि मैं बेगुनाह ज़िंदगी गुज़ारता हूँ। फ़िद्या देकर मुझे छुटकारा दे! मुझ पर मेहरबानी कर!

12मेरे पाँव हमवार ज़मीन पर क़ायम हो गए हैं, और मैं इजतिमाओं में रब की सताइश करूँगा।

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ज़बूर 26 — urdu:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019Kitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس