1ऐ ख़ुदावन्द, मेरा इन्साफ़ कर,
2ऐ ख़ुदावन्द, मुझे जाँच और आज़मा;
3क्यूँकि तेरी शफ़क़त मेरी आँखों के सामने है,
4मैं बेहूदा लोगों के साथ नहीं बैठा,
5बदकिरदारों की जमा'अत से मुझे नफ़रत है,
6मैं बेगुनाही में अपने हाथ धोऊँगा,
7ताकि शुक्रगुज़ारी की आवाज़ बुलन्द करूँ,
8ऐ ख़ुदावन्द, मैं तेरी सकूनतगाह,
9मेरी जान को गुनहगारों के साथ,
10जिनके हाथों में शरारत है,
11लेकिन मैं तो रास्ती से चलता रहूँगा।
12मेरा पाँव हमवार जगह पर क़ाईम है।