1दाऊद का ज़बूर।
2ऐ मेरे ख़ुदा, तुझ पर मैं भरोसा रखता हूँ। मुझे शरमिंदा न होने दे कि मेरे दुश्मन मुझ पर शादियाना बजाएँ।
3क्योंकि जो भी तुझ पर उम्मीद रखे वह शरमिंदा नहीं होगा जबकि जो बिलावजह बेवफ़ा होते हैं वही शरमिंदा हो जाएंगे।
4ऐ रब, अपनी राहें मुझे दिखा, मुझे अपने रास्तों की तालीम दे।
5अपनी सच्चाई के मुताबिक़ मेरी राहनुमाई कर, मुझे तालीम दे। क्योंकि तू मेरी नजात का ख़ुदा है। दिन-भर मैं तेरे इंतज़ार में रहता हूँ।
6ऐ रब, अपना वह रहम और मेहरबानी याद कर जो तू क़दीम ज़माने से करता आया है।
7ऐ रब, मेरी जवानी के गुनाहों और मेरी बेवफ़ा हरकतों को याद न कर बल्कि अपनी भलाई की ख़ातिर और अपनी शफ़क़त के मुताबिक़ मेरा ख़याल रख।
8रब भला और आदिल है, इसलिए वह गुनाहगारों को सहीह राह पर चलने की तलक़ीन करता है।
9वह फ़रोतनों की इनसाफ़ की राह पर राहनुमाई करता, हलीमों को अपनी राह की तालीम देता है।
10जो रब के अहद और अहकाम के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारें उन्हें रब मेहरबानी और वफ़ादारी की राहों पर ले चलता है।
11ऐ रब, मेरा क़ुसूर संगीन है, लेकिन अपने नाम की ख़ातिर उसे मुआफ़ कर।
12रब का ख़ौफ़ माननेवाला कहाँ है? रब ख़ुद उसे उस राह की तालीम देगा जो उसे चुनना है।
13तब वह ख़ुशहाल रहेगा, और उस की औलाद मुल्क को मीरास में पाएगी।
14जो रब का ख़ौफ़ मानें उन्हें वह अपने हमराज़ बनाकर अपने अहद की तालीम देता है।
15मेरी आँखें रब को तकती रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पाँवों को जाल से निकाल लेता है।
16मेरी तरफ़ मायल हो जा, मुझ पर मेहरबानी कर! क्योंकि मैं तनहा और मुसीबतज़दा हूँ।
17मेरे दिल की परेशानियाँ दूर कर, मुझे मेरी तकालीफ़ से रिहाई दे।
18मेरी मुसीबत और तंगी पर नज़र डालकर मेरी ख़ताओं को मुआफ़ कर।
19देख, मेरे दुश्मन कितने ज़्यादा हैं, वह कितना ज़ुल्म करके मुझसे नफ़रत करते हैं।
20मेरी जान को महफ़ूज़ रख, मुझे बचा! मुझे शरमिंदा न होने दे, क्योंकि मैं तुझमें पनाह लेता हूँ।
21बेगुनाही और दियानतदारी मेरी पहरादारी करें, क्योंकि मैं तेरे इंतज़ार में रहता हूँ।
22ऐ अल्लाह, फ़िद्या देकर इसराईल को उस की तमाम तकालीफ़ से आज़ाद कर!