We Believe JesusFé, Esperança e Nova Vida

ज़बूर 24

किताबे-मुक़द्दस · urdu

← ज़बूर 23 ज़बूर ज़बूर 25 →

1दाऊद का ज़बूर।

2क्योंकि उसने ज़मीन की बुनियाद समुंदरों पर रखी और उसे दरियाओं पर क़ायम किया।

3किस को रब के पहाड़ पर चढ़ने की इजाज़त है? कौन उसके मुक़द्दस मक़ाम में खड़ा हो सकता है?

4वह जिसके हाथ पाक और दिल साफ़ हैं, जो न फ़रेब का इरादा रखता, न क़सम खाकर झूट बोलता है।

5वह रब से बरकत पाएगा, उसे अपनी नजात के ख़ुदा से रास्ती मिलेगी।

6यह होगा उन लोगों का हाल जो अल्लाह की मरज़ी दरियाफ़्त करते, जो तेरे चेहरे के तालिब होते हैं, ऐ याक़ूब के ख़ुदा। (सिलाह)

7ऐ फाटको, खुल जाओ! ऐ क़दीम दरवाज़ो, पूरे तौर पर खुल जाओ ताकि जलाल का बादशाह दाख़िल हो जाए।

8जलाल का बादशाह कौन है? रब जो क़वी और क़ादिर है, रब जो जंग में ज़ोरावर है।

9ऐ फाटको, खुल जाओ! ऐ क़दीम दरवाज़ो, पूरे तौर पर खुल जाओ ताकि जलाल का बादशाह दाख़िल हो जाए।

10जलाल का बादशाह कौन है? रब्बुल-अफ़वाज, वही जलाल का बादशाह है। (सिलाह)

← ज़बूर 23 ज़बूर ज़बूर 25 →

ज़बूर 24 — urdu:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019Kitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس