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ज़बूर 125

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1ज़ियारत का गीत।

2जिस तरह यरूशलम पहाड़ों से घिरा रहता है उसी तरह रब अपनी क़ौम को अब से अबद तक चारों तरफ़ से महफ़ूज़ रखता है।

3क्योंकि बेदीनों की रास्तबाज़ों की मीरास पर हुकूमत नहीं रहेगी, ऐसा न हो कि रास्तबाज़ बदकारी करने की आज़माइश में पड़ जाएँ।

4ऐ रब, उनसे भलाई कर जो नेक हैं, जो दिल से सीधी राह पर चलते हैं।

5लेकिन जो भटककर अपनी टेढ़ी-मेढ़ी राहों पर चलते हैं उन्हें रब बदकारों के साथ ख़ारिज कर दे। इसराईल की सलामती हो!

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ज़बूर 125 — urdu:

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