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ज़बूर 124

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1दाऊद का ज़ियारत का गीत।

2अगर रब हमारे साथ न होता जब लोग हमारे ख़िलाफ़ उठे

3और आग-बगूला होकर अपना पूरा ग़ुस्सा हम पर उतारा, तो वह हमें ज़िंदा हड़प कर लेते।

4फिर सैलाब हम पर टूट पड़ता, नदी का तेज़ धारा हम पर ग़ालिब आ जाता

5और मुतलातिम पानी हम पर से गुज़र जाता।”

6रब की हम्द हो जिसने हमें उनके दाँतों के हवाले न किया, वरना वह हमें फाड़ खाते।

7हमारी जान उस चिड़िया की तरह छूट गई है जो चिड़ीमार के फंदे से निकलकर उड़ गई है। फंदा टूट गया है, और हम बच निकले हैं।

8रब का नाम, हाँ उसी का नाम हमारा सहारा है जो आसमानो-ज़मीन का ख़ालिक़ है।

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ज़बूर 124 — urdu:

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