1ख़ुदावन्द के सामने नया हम्द गाओ!
2ख़ुदावन्द के सामने गाओ, उसके नाम को मुबारक कहो;
3क़ौमों में उसके जलाल का,
4क्यूँकि ख़ुदावन्द बुज़ु़र्ग़ और बहुत। सिताइश के लायक़ है;
5इसलिए कि और क़ौमों के सब मा'बूद सिर्फ़ बुत हैं;
6अज़मत और जलाल उसके सामने में हैं,
7ऐ क़ौमों के क़बीलो! ख़ुदावन्द की,
8ख़ुदावन्द की ऐसी तम्जीद करो जो उसके नाम की शायान है;
9पाक आराइश के साथ ख़ुदावन्द को सिज्दा करो;
10क़ौमों में 'ऐलान करो, “ख़ुदावन्द सल्तनत करता है!
11आसमान ख़ुशी मनाए, और ज़मीन ख़ुश हो;
12मैदान और जो कुछ उसमें है, बाग़ — बाग़ हों;
13ख़ुदावन्द के सामने, क्यूँकि वह आ रहा है;