1ख़ुदा की जमा'अत में ख़ुदा मौजूद है।
2“तुम कब तक बेइन्साफ़ी से 'अदालत करोगे,
3ग़रीब और यतीम का इन्साफ़ करो,
4ग़रीब और मोहताज को बचाओ;
5वह न तो कुछ जानते हैं न समझते हैं,
6मैंने कहा था, “तुम इलाह हो,
7तोभी तुम आदमियों की तरह मरोगे,
8ऐ ख़ुदा! उठ ज़मीन की 'अदालत कर