1ऐ ख़ुदावन्द हमारे रब तेरा नाम तमाम ज़मीन पर कैसा बुज़ु़र्ग़ है!
2तूने अपने मुखालिफ़ों की वजह से बच्चों और शीरख़्वारों के मुँह से कु़दरत को क़ाईम किया,
3जब मैं तेरे आसमान पर जो तेरी दस्तकारी है,
4तो फिर इंसान क्या है कि तू उसे याद रख्खे,
5क्यूँकि तूने उसे ख़ुदा से कुछ ही कमतर बनाया है,
6तूने उसे अपनी दस्तकारी पर इख़्तियार बख़्शा है;
7सब भेड़ — बकरियाँ,
8हवा के परिन्दे और समन्दर की
9ऐ ख़ुदावन्द, हमारे रब्ब!