1मैं अपने पूरे दिल से ख़ुदावन्द की शुक्रगुज़ारी करूँगा;
2मैं तुझ में ख़ुशी मनाऊँगा और मसरूर हूँगा;
3जब मेरे दुश्मन पीछे हटते हैं,
4क्यूँकि तूने मेरे हक़ की और मेरे मु'आमिले की ताईद की है।
5तूने क़ौमों को झिड़का, तूने शरीरों को हलाक किया है;
6दुश्मन ख़त्म हुए, वह हमेशा के लिए बर्बाद हो गए;
7लेकिन ख़ुदावन्द हमेशा तक तख़्त नशीन है,
8और वही सदाक़त से जहान की 'अदालत करेगा,
9ख़ुदावन्द मज़लूमों के लिए ऊँचा बुर्ज होगा,
10और वह जो तेरा नाम जानते हैं तुझ पर भरोसा करेंगे,
11ख़ुदावन्द की सिताइश करो, जो सिय्यूनमें रहता है!
12क्यूँकि खू़न का पूछताछ करने वाला उनको याद रखता है;
13ऐ ख़ुदावन्द, मुझ पर रहम कर।
14ताकि मैं तेरी कामिल सिताइश का इज़हार करूँ।
15क़ौमें खु़द उस गढ़े में गिरी हैं जिसे उन्होंने खोदा था;
16ख़ुदावन्द की शोहरत फैल गई, उसने इन्साफ़ किया है;
17शरीर पाताल में जाएँगे,
18क्यूँकि ग़रीब सदा भूले बिसरे न रहेंगे,
19उठ, ऐ ख़ुदावन्द! इंसान ग़ालिब न होने पाए।
20ऐ ख़ुदावन्द! उनको ख़ौफ़ दिला।