1ऐ फ़रिश्तों की जमा'त ख़ुदावन्द की,
2ख़ुदावन्द की ऐसी तम्जीद करो, जो उसके नाम के शायाँ है।
3ख़ुदावन्द की आवाज़ बादलों पर है;
4ख़ुदावन्द की आवाज़ में क़ुदरत है;
5ख़ुदावन्द की आवाज़ देवदारों को तोड़ डालती है;
6वह उनको बछड़े की तरह,
7ख़ुदावन्द की आवाज़ आग के शो'लों को चीरती है।
8ख़ुदावन्द की आवाज़ वीरान को हिला देती है;
9ख़ुदावन्द की आवाज़ से हिरनीयों के हमल गिर जाते हैं;
10ख़ुदावन्द तूफ़ान के वक़्त तख़्तनशीन था;
11ख़ुदावन्द अपनी उम्मत को ज़ोर बख़्शेगा;