1ऐ ख़ुदावन्द, मैं तुझ ही को पुकारूँगा;
2जब मैं तुझ से फ़रियाद करूँ,
3मुझे उन शरीरों और बदकिरदारों के साथ घसीट न ले जा;
4उनके अफ़'आल — ओ — आ'माल की बुराई के मुवाफ़िक़ उनको बदला दे,
5वह ख़ुदावन्द के कामों
6ख़ुदावन्द मुबारक हो,
7ख़ुदावन्द मेरी ताक़त और मेरी ढाल है;
8ख़ुदावन्द उनकी ताक़त है,
9अपनी उम्मत को बचा, और अपनी मीरास को बरकत दे;