1इस्राईल अब यूँ कहे,
2हाँ, उन्होंने मेरी जवानी से अब तक मुझे बार बार सताया,
3हलवाहों ने मेरी पीठ पर हल चलाया,
4ख़ुदावन्द सादिक़ है;
5सिय्यून से नफ़रत रखने वाले,
6वह छत पर की घास की तरह हों,
7जिससे फ़सल काटने वाला अपनी मुट्ठी को,
8न आने जाने वाले यह कहते हैं,