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भजन संहिता 129

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019 · hindi

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1इस्राएल अब यह कहे,

2मेरे बचपन से वे मुझ को बार बार क्लेश देते तो आए हैं,

3हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया129:3 हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया: यह रूपक ही भूमि जोतने का है उसमें निहित विचार यह है कि कष्ट ऐसे हैं जैसे हल धरती का सीना चीरता है। ,

4यहोवा धर्मी है;

5जितने सिय्योन से बैर रखते हैं,

6वे छत पर की घास के समान हों,

7जिससे कोई लवनेवाला अपनी मुट्ठी नहीं भरता129:7 जिससे कोई लवनेवाला अपनी मुट्ठी नहीं भरता: वह एकत्र करके मवेशियों के लिए नहीं रखी जाती जैसे मैदान की घास। ऐसे किसी काम के लिए वह व्यर्थ है या वह पूर्णतः निकम्मी है। ,

8और न आने-जानेवाले यह कहते हैं,

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भजन संहिता 129 — hindi:

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