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स्तोत्र 129

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1“मेरे बचपन से वे मुझ पर घोर अत्याचार करते आए हैं,”

2“मेरे बचपन से वे मुझ पर घोर अत्याचार करते आए हैं,

3हल चलानेवालों ने मेरे पीठ पर हल चलाया है,

4किंतु याहवेह युक्त है;

5वे सभी, जिन्हें ज़ियोन से बैर है,

6उनकी नियति भी वही हो, जो घर की छत पर उग आई घास की होती है,

7किसी के हाथों में कुछ भी नहीं आता,

8आते जाते पुरुष यह कभी न कह पाएं,

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स्तोत्र 129 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019