We Believe JesusFé, Esperança e Nova Vida

अमसाल 4

किताबे-मुक़द्दस · urdu

← अमसाल 3 अमसाल अमसाल 5 →

1ऐ बेटो, बाप की नसीहत सुनो, ध्यान दो ताकि तुम सीखकर समझ हासिल कर सको।

2मैं तुम्हें अच्छी तालीम देता हूँ, इसलिए मेरी हिदायत को तर्क न करो।

3मैं अभी अपने बाप के घर में नाज़ुक लड़का था, अपनी माँ का वाहिद बच्चा,

4तो मेरे बाप ने मुझे तालीम देकर कहा,

5हिकमत हासिल कर, समझ अपना ले! यह चीज़ें मत भूलना, मेरे मुँह के अलफ़ाज़ से दूर न होना।

6हिकमत तर्क न कर तो वह तुझे महफ़ूज़ रखेगी। उससे मुहब्बत रख तो वह तेरी देख-भाल करेगी।

7हिकमत इससे शुरू होती है कि तू हिकमत अपना ले। समझ हासिल करने के लिए बाक़ी तमाम मिलकियत क़ुरबान करने के लिए तैयार हो।

8उसे अज़ीज़ रख तो वह तुझे सरफ़राज़ करेगी, उसे गले लगा तो वह तुझे इज़्ज़त बख़्शेगी।

9तब वह तेरे सर को ख़ूबसूरत सेहरे से आरास्ता करेगी और तुझे शानदार ताज से नवाज़ेगी।”

10मेरे बेटे, मेरी सुन! मेरी बातें अपना ले तो तेरी उम्र दराज़ होगी।

11मैं तुझे हिकमत की राह पर चलने की हिदायत देता, तुझे सीधी राहों पर फिरने देता हूँ।

12जब तू चलेगा तो तेरे क़दमों को किसी भी चीज़ से रोका नहीं जाएगा, और दौड़ते वक़्त तू ठोकर नहीं खाएगा।

13तरबियत का दामन थामे रह! उसे न छोड़ बल्कि महफ़ूज़ रख, क्योंकि वह तेरी ज़िंदगी है।

14बेदीनों की राह पर क़दम न रख, शरीरों के रास्ते पर मत जा।

15उससे गुरेज़ कर, उस पर सफ़र न कर बल्कि उससे कतराकर आगे निकल जा।

16क्योंकि जब तक उनसे बुरा काम सरज़द न हो जाए वह सो ही नहीं सकते, जब तक उन्होंने किसी को ठोकर खिलाकर ख़ाक में मिला न दिया हो वह नींद से महरूम रहते हैं।

17वह बेदीनी की रोटी खाते और ज़ुल्म की मै पीते हैं।

18लेकिन रास्तबाज़ की राह तुलूए-सुबह की पहली रौशनी की मानिंद है जो दिन के उरूज तक बढ़ती रहती है।

19इसके मुक़ाबले में बेदीन का रास्ता गहरी तारीकी की मानिंद है, उन्हें पता ही नहीं चलता कि किस चीज़ से ठोकर खाकर गिर गए हैं।

20मेरे बेटे, मेरी बातों पर ध्यान दे, मेरे अलफ़ाज़ पर कान धर।

21उन्हें अपनी नज़र से ओझल न होने दे बल्कि अपने दिल में महफ़ूज़ रख।

22क्योंकि जो यह बातें अपनाएँ वह ज़िंदगी और पूरे जिस्म के लिए शफ़ा पाते हैं।

23तमाम चीज़ों से पहले अपने दिल की हिफ़ाज़त कर, क्योंकि यही ज़िंदगी का सरचश्मा है।

24अपने मुँह से झूट और अपने होंटों से कजगोई दूर कर।

25ध्यान दे कि तेरी आँखें सीधा आगे की तरफ़ देखें, कि तेरी नज़र उस रास्ते पर लगी रहे जो सीधा है।

26अपने पाँवों का रास्ता चलने के क़ाबिल बना दे, ध्यान दे कि तेरी राहें मज़बूत हैं।

27न दाईं, न बाईं तरफ़ मुड़ बल्कि अपने पाँवों को ग़लत क़दम उठाने से बाज़ रख।

← अमसाल 3 अमसाल अमसाल 5 →

अमसाल 4 — urdu:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019Kitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس