1ऐ मेरे बेटो, बाप की तरबियत पर कान लगाओ,
2क्यूँकि मैं तुम को अच्छी तल्क़ीन करता तुम मेरी ता'लीम को न छोड़ना।
3क्यूँकि मैं भी अपने बाप का बेटा था,
4बाप ने मुझे सिखाया और मुझ से कहा,
5हिकमत हासिल कर, समझ हासिल कर,
6हिकमत को न छोड़ना, वह तेरी हिफ़ाज़त करेगी;
7हिकमत अफ़ज़ल असल है, फिर हिकमत हासिल कर;
8उसकी ता'ज़ीम कर, वह तुझे सरफ़राज़ करेगी;
9वह तेरे सिर पर ज़ीनत का सेहरा बाँधेगी;
10ऐ मेरे बेटे, सुन और मेरी बातों को कु़बूल कर,
11मैंने तुझे हिकमत की राह बताई है;
12जब तू चलेगा तेरे क़दम कोताह न होंगे;
13तरबियत को मज़बूती से पकड़े रह, उसे जाने न दे;
14शरीरों के रास्ते में न जाना,
15उससे बचना, उसके पास से न गुज़रना,
16क्यूँकि वह जब तक बुराई न कर लें सोते नहीं;
17क्यूँकि वह शरारत की रोटी खाते,
18लेकिन सादिक़ों की राह सुबह की रोशनी की तरह है,
19शरीरों की राह तारीकी की तरह है;
20ऐ मेरे बेटे, मेरी बातों पर तवज्जुह कर,
21उसको अपनी आँख से ओझल न होने दे,
22क्यूँकि जो इसको पा लेते हैं, यह उनकी ज़िन्दगी,
23अपने दिल की खू़ब हिफ़ाज़त कर;
24कजगो मुँह तुझ से अलग रहे,
25तेरी आँखें सामने ही नज़र करें,
26अपने पाँव के रास्ते को हमवार बना,
27न दहने मुड़ न बाएँ;