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अम्सा 4

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1ऐ मेरे बेटो, बाप की तरबियत पर कान लगाओ,

2क्यूँकि मैं तुम को अच्छी तल्क़ीन करता तुम मेरी ता'लीम को न छोड़ना।

3क्यूँकि मैं भी अपने बाप का बेटा था,

4बाप ने मुझे सिखाया और मुझ से कहा,

5हिकमत हासिल कर, समझ हासिल कर,

6हिकमत को न छोड़ना, वह तेरी हिफ़ाज़त करेगी;

7हिकमत अफ़ज़ल असल है, फिर हिकमत हासिल कर;

8उसकी ता'ज़ीम कर, वह तुझे सरफ़राज़ करेगी;

9वह तेरे सिर पर ज़ीनत का सेहरा बाँधेगी;

10ऐ मेरे बेटे, सुन और मेरी बातों को कु़बूल कर,

11मैंने तुझे हिकमत की राह बताई है;

12जब तू चलेगा तेरे क़दम कोताह न होंगे;

13तरबियत को मज़बूती से पकड़े रह, उसे जाने न दे;

14शरीरों के रास्ते में न जाना,

15उससे बचना, उसके पास से न गुज़रना,

16क्यूँकि वह जब तक बुराई न कर लें सोते नहीं;

17क्यूँकि वह शरारत की रोटी खाते,

18लेकिन सादिक़ों की राह सुबह की रोशनी की तरह है,

19शरीरों की राह तारीकी की तरह है;

20ऐ मेरे बेटे, मेरी बातों पर तवज्जुह कर,

21उसको अपनी आँख से ओझल न होने दे,

22क्यूँकि जो इसको पा लेते हैं, यह उनकी ज़िन्दगी,

23अपने दिल की खू़ब हिफ़ाज़त कर;

24कजगो मुँह तुझ से अलग रहे,

25तेरी आँखें सामने ही नज़र करें,

26अपने पाँव के रास्ते को हमवार बना,

27न दहने मुड़ न बाएँ;

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अम्सा 4 — urdu:

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