1चुनाँचे अपनी ज़िंदगी से तमाम तरह की बुराई, धोकेबाज़ी, रियाकारी, हसद और बुहतान निकालें।
2चूँकि आप नौमौलूद बच्चे हैं इसलिए ख़ालिस रूहानी दूध पीने के आरज़ूमंद रहें, क्योंकि इसे पीने से ही आप बढ़ते बढ़ते नजात की नौबत तक पहुँचेंगे।
3जिन्होंने ख़ुदावंद की भलाई का तजरबा किया है उनके लिए ऐसा करना ज़रूरी है।
4ख़ुदावंद के पास आएँ, उस ज़िंदा पत्थर के पास जिसे इनसानों ने रद्द किया है, लेकिन जो अल्लाह के नज़दीक चुनीदा और क़ीमती है।
5और आप भी ज़िंदा पत्थर हैं जिनको अल्लाह अपने रूहानी मक़दिस को तामीर करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। न सिर्फ़ यह बल्कि आप उसके मख़सूसो-मुक़द्दस इमाम हैं। ईसा मसीह के वसीले से आप ऐसी रूहानी क़ुरबानियाँ पेश कर रहे हैं जो अल्लाह को पसंद हैं।
6क्योंकि कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है,
7यह पत्थर आपके नज़दीक जो ईमान रखते हैं बेशक़ीमत है। लेकिन जो ईमान नहीं लाए उन्होंने उसे रद्द किया।
8नीज़ वह एक ऐसा पत्थर है
9लेकिन आप अल्लाह की चुनी हुई नसल हैं, आप आसमानी बादशाह के इमाम और उस की मख़सूसो-मुक़द्दस क़ौम हैं। आप उस की मिलकियत बन गए हैं ताकि अल्लाह के क़वी कामों का एलान करें, क्योंकि वह आपको तारीकी से अपनी हैरतअंगेज़ रौशनी में लाया है।
10एक वक़्त था जब आप उस की क़ौम नहीं थे, लेकिन अब आप अल्लाह की क़ौम हैं। पहले आप पर रहम नहीं हुआ था, लेकिन अब अल्लाह ने आप पर अपने रहम का इज़हार किया है।
11अज़ीज़ो, आप इस दुनिया में अजनबी और मेहमान हैं। इसलिए मैं आपको ताकीद करता हूँ कि आप जिस्मानी ख़ाहिशात का इनकार करें। क्योंकि यह आपकी जान से लड़ती हैं।
12ग़ैरईमानदारों के दरमियान रहते हुए इतनी अच्छी ज़िंदगी गुज़ारें कि गो वह आप पर ग़लत काम करने की तोहमत भी लगाएँ तो भी उन्हें आपके नेक काम नज़र आएँ और उन्हें अल्लाह की आमद के दिन उस की तमजीद करनी पड़े।
13ख़ुदावंद की ख़ातिर हर इनसानी इख़्तियार के ताबे रहें, ख़ाह बादशाह हो जो सबसे आला इख़्तियार रखनेवाला है,
14ख़ाह उसके वज़ीर जिन्हें उसने इसलिए मुक़र्रर किया है कि वह ग़लत काम करनेवालों को सज़ा और अच्छा काम करनेवालों को शाबाश दें।
15क्योंकि अल्लाह की मरज़ी है कि आप अच्छा काम करने से नासमझ लोगों की जाहिल बातों को बंद करें।
16आप आज़ाद हैं, इसलिए आज़ादाना ज़िंदगी गुज़ारें। लेकिन अपनी आज़ादी को ग़लत काम छुपाने के लिए इस्तेमाल न करें, क्योंकि आप अल्लाह के ख़ादिम हैं।
17हर एक का मुनासिब एहतराम करें, अपने बहन-भाइयों से मुहब्बत रखें, ख़ुदा का ख़ौफ़ मानें, बादशाह का एहतराम करें।
18ऐ ग़ुलामो, हर लिहाज़ से अपने मालिकों का एहतराम करके उनके ताबे रहें। और यह सुलूक न सिर्फ़ उनके साथ हो जो नेक और नरमदिल हैं बल्कि उनके साथ भी जो ज़ालिम हैं।
19क्योंकि अगर कोई अल्लाह की मरज़ी का ख़याल करके बेइनसाफ़ तकलीफ़ का ग़म सब्र से बरदाश्त करे तो यह अल्लाह का फ़ज़ल है।
20बेशक इसमें फ़ख़र की कोई बात नहीं अगर आप सब्र से पिटाई की वह सज़ा बरदाश्त करें जो आपको ग़लत काम करने की वजह से मिली हो। लेकिन अगर आपको अच्छा काम करने की वजह से दुख सहना पड़े और आप यह सज़ा सब्र से बरदाश्त करें तो यह अल्लाह का फ़ज़ल है।
21आपको इसी के लिए बुलाया गया है। क्योंकि मसीह ने आपकी ख़ातिर दुख सहने में आपके लिए एक नमूना छोड़ा है। और वह चाहता है कि आप उसके नक़्शे-क़दम पर चलें।
22उसने तो कोई गुनाह न किया, और न कोई फ़रेब की बात उसके मुँह से निकली।
23जब लोगों ने उसे गालियाँ दीं तो उसने जवाब में गालियाँ न दीं। जब उसे दुख सहना पड़ा तो उसने किसी को धमकी न दी बल्कि उसने अपने आपको अल्लाह के हवाले कर दिया जो इनसाफ़ से अदालत करता है।
24मसीह ख़ुद अपने बदन पर हमारे गुनाहों को सलीब पर ले गया ताकि हम गुनाहों के एतबार से मर जाएँ और यों हमारा गुनाह से ताल्लुक़ ख़त्म हो जाए। अब वह चाहता है कि हम रास्तबाज़ी की ज़िंदगी गुज़ारें। क्योंकि आपको उसी के ज़ख़मों के वसीले से शफ़ा मिली है।
25पहले आप आवारा भेड़ों की तरह आवारा फिर रहे थे, लेकिन अब आप अपनी जानों के चरवाहे और निगरान के पास लौट आए हैं।