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1 पतरस 1

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1यह ख़त ईसा मसीह के रसूल पतरस की तरफ़ से है।

2ख़ुदा बाप ने आपको बहुत देर पहले जानकर चुन लिया और उसके रूह ने आपको मख़सूसो-मुक़द्दस कर दिया। नतीजे में आप ईसा मसीह के ताबे और उसके छिड़काए गए ख़ून से पाक-साफ़ हो गए हैं।

3ख़ुदा हमारे ख़ुदावंद ईसा मसीह के बाप की तारीफ़ हो! अपने अज़ीम रहम से उसने ईसा मसीह को ज़िंदा करने के वसीले से हमें नए सिरे से पैदा किया है। इससे हमें एक ज़िंदा उम्मीद मिली है,

4एक ऐसी मीरास जो कभी नहीं सड़ेगी, कभी नहीं नापाक हो जाएगी और कभी नहीं मुरझाएगी। क्योंकि यह आसमान पर आपके लिए महफ़ूज़ रखी गई है।

5और अल्लाह आपके ईमान के ज़रीए अपनी क़ुदरत से आपकी उस वक़्त तक हिफ़ाज़त करता रहेगा जब तक आपको नजात न मिल जाए, वह नजात जो आख़िरत के दिन सब पर ज़ाहिर होने के लिए तैयार है।

6उस वक़्त आप ख़ुशी मनाएँगे, गो फ़िलहाल आपको थोड़ी देर के लिए तरह तरह की आज़माइशों का सामना करके ग़म खाना पड़ता है

7ताकि आपका ईमान असली साबित हो जाए। क्योंकि जिस तरह आग सोने को आज़माकर ख़ालिस बना देती है उसी तरह आपका ईमान भी आज़माया जा रहा है, हालाँकि यह फ़ानी सोने से कहीं ज़्यादा क़ीमती है। क्योंकि अल्लाह चाहता है कि आपको उस दिन तारीफ़, जलाल और इज़्ज़त मिल जाए जब ईसा मसीह ज़ाहिर होगा।

8उसी को आप प्यार करते हैं अगरचे आपने उसे देखा नहीं, और उसी पर आप ईमान रखते हैं गो वह आपको इस वक़्त नज़र नहीं आता। हाँ, आप दिल में नाक़ाबिले-बयान और जलाली ख़ुशी मनाएँगे,

9जब आप वह कुछ पाएँगे जो ईमान की मनज़िले-मक़सूद है यानी अपनी जानों की नजात।

10नबी इसी नजात की तलाश और तफ़तीश में लगे रहे, और उन्होंने उस फ़ज़ल की पेशगोई की जो अल्लाह आपको देनेवाला था।

11उन्होंने मालूम करने की कोशिश की कि मसीह का रूह जो उनमें था किस वक़्त या किन हालात के बारे में बात कर रहा था जब उसने मसीह के दुख और बाद के जलाल की पेशगोई की।

12उन पर इतना ज़ाहिर किया गया कि उनकी यह पेशगोइयाँ उनके अपने लिए नहीं थीं, बल्कि आपके लिए। और अब यह सब कुछ आपको उन्हीं के वसीले से पेश किया गया है जिन्होंने आसमान से भेजे गए रूहुल-क़ुद्स के ज़रीए आपको अल्लाह की ख़ुशख़बरी सुनाई है। यह ऐसी बातें हैं जिन पर फ़रिश्ते भी नज़र डालने के आरज़ूमंद हैं।

13चुनाँचे ज़हनी तौर पर कमरबस्ता हो जाएँ। होशमंदी से अपनी पूरी उम्मीद उस फ़ज़ल पर रखें जो आपको ईसा मसीह के ज़ुहूर पर बख़्शा जाएगा।

14आप अल्लाह के ताबेफ़रमान फ़रज़ंद हैं, इसलिए उन बुरी ख़ाहिशात को अपनी ज़िंदगी में जगह न दें जो आप जाहिल होते वक़्त रखते थे। वरना वह आपकी ज़िंदगी को अपने साँचे में ढाल लेंगी।

15इसके बजाए अल्लाह की मानिंद बनें जिसने आपको बुलाया है। जिस तरह वह क़ुद्दूस है उसी तरह आप भी हर वक़्त मुक़द्दस ज़िंदगी गुज़ारें।

16क्योंकि कलामे-मुक़द्दस में लिखा है, “अपने आपको मख़सूसो-मुक़द्दस रखो क्योंकि मैं मुक़द्दस हूँ।”

17और याद रखें कि आसमानी बाप जिससे आप दुआ करते हैं जानिबदारी नहीं करता बल्कि आपके अमल के मुताबिक़ आपका फ़ैसला करेगा। चुनाँचे जब तक आप इस दुनिया के मेहमान रहेंगे ख़ुदा के ख़ौफ़ में ज़िंदगी गुज़ारें।

18क्योंकि आप ख़ुद जानते हैं कि आपको बापदादा की बेमानी ज़िंदगी से छुड़ाने के लिए क्या फ़िद्या दिया गया। यह सोने या चाँदी जैसी फ़ानी चीज़ नहीं थी

19बल्कि मसीह का क़ीमती ख़ून था। उसी को बेनुक़्स और बेदाग़ लेले की हैसियत से हमारे लिए क़ुरबान किया गया।

20उसे दुनिया की तख़लीक़ से पेशतर चुना गया, लेकिन इन आख़िरी दिनों में आपकी ख़ातिर ज़ाहिर किया गया।

21और उसके वसीले से आप अल्लाह पर ईमान रखते हैं जिसने उसे मुरदों में से ज़िंदा करके इज़्ज़तो-जलाल दिया ताकि आपका ईमान और उम्मीद अल्लाह पर हो।

22सच्चाई के ताबे हो जाने से आपको मख़सूसो-मुक़द्दस कर दिया गया और आपके दिलों में भाइयों के लिए बेरिया मुहब्बत डाली गई है। चुनाँचे अब एक दूसरे को ख़ुलूसदिली और लग्न से प्यार करते रहें।

23क्योंकि आपकी नए सिरे से पैदाइश हुई है। और यह किसी फ़ानी बीज का फल नहीं है बल्कि अल्लाह के लाफ़ानी, ज़िंदा और क़ायम रहनेवाले कलाम का फल है।

24यों कलामे-मुक़द्दस फ़रमाता है,

25लेकिन रब का कलाम अबद तक क़ायम रहता है।”

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