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ज़बूर 94

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1ऐ ख़ुदावन्द! ऐ इन्तक़ाम लेने वाले

2ऐ जहान का इन्साफ़ करने वाले! उठ;

3ऐ ख़ुदावन्द, शरीर कब तक;

4वह बकवास करते और बड़ा बोल बोलत हैं,

5ऐ ख़ुदावन्द! वह तेरे लोगों को पीसे डालते हैं,

6वह बेवा और परदेसी को क़त्ल करते,

7और कहते है “ख़ुदावन्द नहीं देखेगा

8ऐ क़ौम के हैवानो! ज़रा ख़याल करो;

9जिसने कान दिया, क्या वह ख़ुद नहीं सुनता?

10क्या वह जो क़ौमों को तम्बीह करता है,

11ख़ुदावन्द इंसान के ख़यालों को जानता है, कि वह बेकार हैं।

12ऐ ख़ुदावन्द, मुबारक है वह आदमी जिसे तू तम्बीह करता,

13ताकि उसको मुसीबत के दिनों में आराम बख्शे,

14क्यूँकि ख़ुदावन्द अपने लोगों को नहीं छोड़ेगा,

15क्यूँकि 'अद्ल सदाक़त की तरफ़ रुजू' करेगा,

16शरीरों के मुक़ाबले में कौन मेरे लिए उठेगा?

17अगर ख़ुदावन्द मेरा मददगार न होता,

18जब मैंने कहा, मेरा पाँव फिसल चला,

19जब मेरे दिल में फ़िक्रों की कसरत होती है,

20क्या शरारत के तख़्त से तुझे कुछ वास्ता होगा,

21वह सादिक़ की जान लेने को इकट्ठे होते हैं,

22लेकिन ख़ुदावन्द मेरा ऊँचा बुर्ज,

23वह उनकी बदकारी उन ही पर लाएगा,

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ज़बूर 94 — urdu:

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