1ऐ ख़ुदा तू मुझे अपने क़हर में न झिड़क,
2ऐ ख़ुदावन्द, मुझ पर रहम कर, क्यूँकि मैं अधमरा हो गया हूँ।
3मेरी जान भी बहुत ही बेक़रार है;
4लौट ऐ ख़ुदावन्द, मेरी जान को छुड़ा।
5क्यूँकि मौत के बाद तेरी याद नहीं होती,
6मैं कराहते कराहते थक गया,
7मेरी आँख ग़म के मारे बैठी जाती हैं,
8ऐ सब बदकिरदारो, मेरे पास से दूर हो;
9खूदावन्द ने मेरी मिन्नत सुन ली;
10मेरे सब दुश्मन शर्मिन्दा और बहुत ही बेक़रार होंगे;