1ऐ ख़ुदावन्द मेरी बातो पर कान लगा!
2ऐ मेरे बादशाह! ऐ मेरे ख़ुदा! मेरी फ़रियाद की आवाज़ की तरफ़ मुतवज्जिह हो,
3ऐ ख़ुदावन्द तू सुबह को मेरी आवाज़ सुनेगा।
4क्यूँकि तू ऐसा ख़ुदा नहीं जो शरारत से खु़श हो।
5घमंडी तेरे सामने खड़े न होंगे।
6तू उनको जो झूट बोलते हैं हलाक करेगा।
7लेकिन मैं तेरी शफ़क़त की कसरत से तेरे घर में आऊँगा।
8ऐ ख़ुदावन्द! मेरे दुश्मनों की वजह से मुझे अपनी सदाक़त में चला;
9क्यूँकि उनके मुँह में ज़रा सच्चाई नहीं, उनका बातिन सिर्फ़ बुराई है।
10ऐ ख़ुदा तू उनको मुजरिम ठहरा;
11लेकिन वह सब जो तुझ पर भरोसा रखते हैं, शादमान हों,
12क्यूँकि तू सादिक़ को बरकत बख़्शेगा।