We Believe JesusFé, Esperança e Nova Vida

ज़बूर 31

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

← ज़बूर 30 ज़बूर ज़बूर 32 →

1ऐ ख़ुदावन्द! मेरा भरोसा तुझ पर,

2अपना कान मेरी तरफ़ झुका, जल्द मुझे छुड़ा!

3क्यूँकि तू ही मेरी चट्टान और मेरा किला है;

4मुझे उस जाल से निकाल ले जो उन्होंने छिपकर मेरे लिए बिछाया है,

5मैं अपनी रूह तेरे हाथ में सौंपता हूँ: ऐ ख़ुदावन्द!

6मुझे उनसे नफ़रत है जो झूटे मा'बूदों को मानते हैं:

7मैं तेरी रहमत से ख़ुश — ओ — ख़ुर्रम रहूँगा,

8तूने मुझे दुश्मन के हाथ में क़ैद नहीं छोड़ा;

9ऐ ख़ुदावन्द, मुझ पर रहम कर क्यूँकि मैं मुसीबत में हूँ।

10क्यूँकि मेरी जान ग़म में और मेरी उम्र कराहने में फ़ना हुई;

11मैं अपने सब मुख़ालिफ़ों की वजह से अपने पड़ोसियों के लिए,

12मैं मुर्दे की तरह भुला दिया गया हूँ;

13क्यूँकि मैंने बहुतों से अपनी बदनामी सुनी है,

14लेकिन ऐ ख़ुदावन्द, मेरा भरोसा तुझ पर है।

15मेरे दिन तेरे हाथ में हैं;

16अपने चेहरे को अपने बन्दे पर जलवागर फ़रमा;

17ऐ ख़ुदावन्द, मुझे शर्मिन्दा न होने दे क्यूँकि मैंने तुझ से दुआ की है;

18झूटे होंट बन्द हो जाएँ, जो सादिकों के ख़िलाफ़ ग़ुरूर

19आह! तूने अपने डरने वालों के लिए

20तू उनको इंसान की बन्दिशों से अपनी हुज़ूरी के पर्दे में छिपाएगा;

21ख़ुदावन्द मुबारक हो!

22मैंने तो जल्दबाज़ी से कहा था,

23ख़ुदावन्द से मुहब्बत रखो,

24ऐ ख़ुदावन्द पर उम्मीद रखने वालो!

← ज़बूर 30 ज़बूर ज़बूर 32 →

ज़बूर 31 — urdu:

किताबे-मुक़द्दसKitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس