1ऐ ख़ुदावन्द! मेरा भरोसा तुझ पर,
2अपना कान मेरी तरफ़ झुका, जल्द मुझे छुड़ा!
3क्यूँकि तू ही मेरी चट्टान और मेरा किला है;
4मुझे उस जाल से निकाल ले जो उन्होंने छिपकर मेरे लिए बिछाया है,
5मैं अपनी रूह तेरे हाथ में सौंपता हूँ: ऐ ख़ुदावन्द!
6मुझे उनसे नफ़रत है जो झूटे मा'बूदों को मानते हैं:
7मैं तेरी रहमत से ख़ुश — ओ — ख़ुर्रम रहूँगा,
8तूने मुझे दुश्मन के हाथ में क़ैद नहीं छोड़ा;
9ऐ ख़ुदावन्द, मुझ पर रहम कर क्यूँकि मैं मुसीबत में हूँ।
10क्यूँकि मेरी जान ग़म में और मेरी उम्र कराहने में फ़ना हुई;
11मैं अपने सब मुख़ालिफ़ों की वजह से अपने पड़ोसियों के लिए,
12मैं मुर्दे की तरह भुला दिया गया हूँ;
13क्यूँकि मैंने बहुतों से अपनी बदनामी सुनी है,
14लेकिन ऐ ख़ुदावन्द, मेरा भरोसा तुझ पर है।
15मेरे दिन तेरे हाथ में हैं;
16अपने चेहरे को अपने बन्दे पर जलवागर फ़रमा;
17ऐ ख़ुदावन्द, मुझे शर्मिन्दा न होने दे क्यूँकि मैंने तुझ से दुआ की है;
18झूटे होंट बन्द हो जाएँ, जो सादिकों के ख़िलाफ़ ग़ुरूर
19आह! तूने अपने डरने वालों के लिए
20तू उनको इंसान की बन्दिशों से अपनी हुज़ूरी के पर्दे में छिपाएगा;
21ख़ुदावन्द मुबारक हो!
22मैंने तो जल्दबाज़ी से कहा था,
23ख़ुदावन्द से मुहब्बत रखो,
24ऐ ख़ुदावन्द पर उम्मीद रखने वालो!