1ख़ुदावन्द की हम्द करो ऐ मेरी जान,
2मैं उम्र भर ख़ुदावन्द की हम्द करूँगा,
3न उमरा पर भरोसा करो न आदमज़ाद पर,
4उसका दम निकल जाता है तो वह मिट्टी में मिल जाता है;
5खु़श नसीब है वह, जिसका मददगार या'क़ूब का ख़ुदा है,
6जिसने आसमान और ज़मीन और समन्दर को,
7जो मज़लूमों का इन्साफ़ करता है;
8ख़ुदावन्द अन्धों की आँखें खोलता है;
9ख़ुदावन्द परदेसियों की हिफ़ाज़त करता है;
10ख़ुदावन्द, हमेशा तक सल्तनत करेगा,