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ज़बूर 145

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1ऐ मेरे ख़ुदा, मेरे बादशाह! मैं तेरी तम्जीद करूँगा।

2मैं हर दिन तुझे मुबारक कहूँगा,

3ख़ुदावन्द बुजु़र्ग और बेहद सिताइश के लायक़ है;

4एक नसल दूसरी नसल से तेरे कामों की ता'रीफ़,

5मैं तेरी 'अज़मत की जलाली शान पर,

6और लोग तेरी कु़दरत के हौलनाक कामों का ज़िक्र करेंगे,

7वह तेरे बड़े एहसान की यादगार का बयान करेंगे,

8ख़ुदावन्द रहीम — ओ — करीम है;

9ख़ुदावन्द सब पर मेहरबान है,

10ऐ ख़ुदावन्द, तेरी सारी मख़लूक़ तेरा शुक्र करेगी,

11वह तेरी सल्तनत के जलाल का बयान,

12ताकि बनी आदम पर उसके कुदरत के कामों को,

13तेरी सल्तनत हमेशा की सल्तनत है,

14ख़ुदावन्द गिरते हुए को संभालता,

15सब की आँखें तुझ पर लगी हैं,

16तू अपनी मुट्ठी खोलता है,

17ख़ुदावन्द अपनी सब राहों में सादिक़,

18ख़ुदावन्द उन सबके क़रीब है जो उससे दुआ करते हैं,

19जो उससे डरते हैं वह उनकी मुराद पूरी करेगा,

20ख़ुदावन्द अपने सब मुहब्बत रखने वालों की हिफ़ाज़त करेगा;

21मेरे मुँह से ख़ुदावन्द की सिताइश होगी,

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ज़बूर 145 — urdu:

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