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ज़बूर 132

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1ऐ ख़ुदावन्द! दाऊद कि ख़ातिर उसकी सब मुसीबतों को याद कर;

2कि उसने किस तरह ख़ुदावन्द से क़सम खाई,

3“यक़ीनन मैं न अपने घर में दाख़िल हूँगा,

4और न अपनी आँखों में नींद,

5जब तक ख़ुदावन्द के लिए कोई जगह,

6देखो, हम ने उसकी ख़बर इफ़्राता में सुनी;

7हम उसके घरों में दाखि़ल होंगे,

8उठ, ऐ ख़ुदावन्द! अपनी आरामगाह में दाखि़ल हो!

9तेरे काहिन सदाक़त से मुलब्बस हों,

10अपने बन्दे दाऊद की ख़ातिर,

11ख़ुदावन्द ने सच्चाई के साथ दाऊद से क़सम खाई है;

12अगर तेरे फ़र्ज़न्द मेरे 'अहद और मेरी शहादत पर,

13क्यूँकि ख़ुदावन्द ने सिय्यून को चुना है,

14“यह हमेशा के लिए मेरी आरामगाह है;

15मैं इसके रिज़क़ में ख़ूब बरकत दूँगा;

16इसके काहिनों को भी मैं नजात से मुलव्वस करूँगा

17वहीं मैं दाऊद के लिए एक सींग निकालूँगा मैंने

18मैं उसके दुश्मनों को शर्मिन्दगी का लिबास पहनाऊँगा,

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ज़बूर 132 — urdu:

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