1तब बिलदद सूखी कहने लगा,
2तू कब तक ऐसे ही बकता रहेगा,
3क्या ख़ुदा बेइन्साफ़ी करता है?
4अगर तेरे फ़र्ज़न्दों ने उसका गुनाह किया है,
5तोभी अगर तू ख़ुदा को खू़ब ढूँडता,
6तो अगर तू पाक दिल और रास्तबाज़ होता,
7और अगरचे तेरा आग़ाज़ छोटा सा था,
8ज़रा पिछले ज़माने के लोंगों से पू छ
9क्यूँकि हम तो कल ही के हैं,
10क्या वह तुझे न सिखाएँगे और न बताएँगे
11क्या नागरमोंथा बग़ैर कीचड़ के उग सकता है
12जब वह हरा ही है और काटा भी नहीं गया तोभी
13ऐसी ही उन सब की राहें हैं,
14उसका ऐतमा'द जाता रहेगा
15वह अपने घर पर टेक लगाएगा लेकिन वह खड़ा न रहेगा,
16वह धूप पाकर हरा भरा हो जाता है
17उसकी जड़ें ढेर में लिपटी हुई रहती हैं,
18अगर वह अपनी जगह से हलाक किया जाए तो वह उसका इन्कार करके कहने लगेंगी,
19देख उसके रस्ते की ख़ुशी इतनी ही है,
20देख ख़ुदा कामिल आदमी को छोड़ न देगा,
21वह अब भी तेरे मुँह को हँसी से भर देगा
22तेरे नफ़रत करने वाले शर्म का जामा' पहनेंगे