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स्तोत्र 53

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1मूर्ख मन ही मन में कहते हैं,

2स्वर्ग से परमेश्वर

3सभी मनुष्य भटक गए हैं, सभी नैतिक रूप से भ्रष्‍ट हो चुके हैं;

4मेरी प्रजा के ये भक्षक, ये दुष्ट पुरुष, क्या ऐसे निर्बुद्धि हैं?

5जहां भय का कोई कारण ही न था,

6कैसा उत्तम होता यदि इस्राएल का उद्धार ज़ियोन से प्रगट होता!

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स्तोत्र 53 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019