1याहवेह का स्तवन हो.
2अति उदात्त हैं याहवेह के कृत्य;
3महिमामय और भव्य हैं याहवेह के ये कृत्य,
4याहवेह ने अपने इन कृत्यों को अविस्मरणीय बना दिया है;
5अपने श्रद्धालुओं के लिए वह आहार का प्रबंध करते हैं;
6उन्होंने अपनी प्रजा पर इन कृत्यों की सामर्थ्य प्रकट कर दी,
7उनके द्वारा निष्पन्न समस्त कार्य विश्वासयोग्य और न्याय के हैं;
8वे सदा-सर्वदा के लिए अटल हैं,
9याहवेह ने अपनी प्रजा का उद्धार किया;
10याहवेह के प्रति श्रद्धा बुद्धि का मूल है;