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यशायाह 54

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1यह याहवेह की वाणी है,

2अपने तंबू के पर्दों को फैला दो,

3क्योंकि अब तुम दाएं तथा बाएं दोनों ही ओर को बढ़ाओगे;

4“मत डर; क्योंकि तुम्हें लज्जित नहीं होना पड़ेगा.

5क्योंकि तुम्हें रचनेवाला तुम्हारा पति है—

6क्योंकि याहवेह ने तुम्हें बुलाया है

7“कुछ पल के लिए ही मैंने तुझे छोड़ा था,

8कुछ ही क्षणों के लिए

9“क्योंकि मेरी दृष्टि में तो यह सब नोहा के समय जैसा है,

10चाहे पहाड़ हट जाएं

11“हे दुखियारी, तू जो आंधी से सताई है और जिसको शांति नहीं मिली,

12और मैं तुम्हारे शिखरों को मूंगों से,

13वे याहवेह द्वारा सिखाए हुए होंगे,

14तू धार्मिकता के द्वारा स्थिर रहेगी:

15यदि कोई तुम पर हमला करे, तो याद रखना वह मेरी ओर से न होगा;

16“सुन, लोहार कोयले की आग में

17कोई भी हथियार ऐसा नहीं बनाया गया, जो तुम्हें नुकसान पहुंचा सके,

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यशायाह 54 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019