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यशायाह 2

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1यहूदिया और येरूशलेम के विषय में आमोज़ के पुत्र यशायाह ने दर्शन देखा:

2कि अंत के दिनों

3और कहेंगे,

4परमेश्वर राज्यों के बीच न्याय करेंगे

5याकोब के लोग आओ,

6याहवेह, ने तो अपनी प्रजा,

7उनका देश भी सोना और चांदी से भरा है;

8उनका देश मूर्तियों से भरा है;

9और मनुष्य उसके सामने झुकते

10याहवेह के डर तथा उनके प्रताप के तेज के कारण

11मनुष्यों का घमंड नीचा करके;

12क्योंकि हर घमंडी एवं अहंकारी व्यक्ति के लिए सर्वशक्तिमान याहवेह ने दिन ठहराया है,

13और लबानोन के समस्त ऊंचे देवदारों,

14समस्त ऊंचे पहाडों

15समस्त ऊंचे गुम्मटों

16तरशीश के सब जहाजों

17जो मनुष्य का घमंड

18सब मूर्तियां नष्ट कर दी जाएंगी.

19जब याहवेह पृथ्वी को कंपित करने के लिए उठेंगे

20उस दिन मनुष्य अपनी सोने-चांदी की मूर्तियां जिन्हें उन्होंने बनाई थी,

21जब याहवेह पृथ्वी को कंपित करने के लिए उठेंगे

22तुम मनुष्यों से दूर रहो,

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यशायाह 2 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019