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यशायाह 1

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

यशायाह यशायाह 2 →

1यहूदिया तथा येरूशलेम के विषय में आमोज़ के पुत्र यशायाह का दर्शन, जो उन्हें यहूदिया के राजा उज्जियाह, योथाम, आहाज़, और हिज़किय्याह के शासनकाल में प्राप्‍त हुआ.

2हे आकाश! और पृथ्वी सुनो!

3बैल अपने स्वामी को जानता है,

4हाय है तुम लोगों पर,

5तुम क्यों बुरा बनना चाहते हो?

6सिर से पांव तक घाव और शरीर में

7तुम्हारा देश उजड़ गया,

8ज़ियोन की पुत्री

9यदि सर्वशक्तिमान याहवेह ने

10सोदोम के शासको,

11याहवेह कहता है,

12जब तुम मेरे सामने आते हो,

13अब मुझे अन्‍नबलि न चढ़ाना

14नफरत है मुझे

15तब जब तुम प्रार्थना में मेरी ओर अपने हाथ फैलाओगे,

16“तुम अपने आपको शुद्ध करो.

17अच्छा काम करना सीखो;

18याहवेह यों कहते हैं, “अब आओ, हम मिलकर इसका निष्कर्ष निकालें,

19यदि सच्चाई से मेरी बात मानोगे,

20और यदि तुम विरोध करो और बात न मानोगे,

21वह नगर जिसमें सत्य, न्याय और धार्मिकता पाई जाती है,

22तुम्हारी चांदी में मिलावट है,

23राज्य करनेवाले विद्रोही,

24अतः इस्राएल के सर्वशक्तिमान,

25मैं तुम्हारे विरुद्ध अपना हाथ उठाऊंगा;

26मैं फिर से न्यायी और मंत्री बनाऊंगा और उनको उनका पद दूंगा.

27ज़ियोन को न्याय से,

28लेकिन विद्रोहियों और पापियों को एक साथ नष्ट कर दिया जाएगा,

29“वे उन बांज वृक्षों से,

30तुम उस बांज वृक्ष के समान हो जाओगे जिसके पत्ते सूख गए हैं,

31बलवान व्यक्ति आग

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यशायाह 1 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019