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भजन संहिता 38

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019 · hindi

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1हे यहोवा क्रोध में आकर मुझे झिड़क न दे,

2क्योंकि तेरे तीर मुझ में लगे हैं,

3तेरे क्रोध के कारण मेरे शरीर में कुछ भी

4क्योंकि मेरे अधर्म के कामों में

5मेरी मूर्खता के पाप के कारण मेरे घाव सड़ गए38:5 मेरे घाव सड़ गए: अर्थात् वह पापों के कारण प्रताड़ित किया जा रहा था और उसकी मार के चिन्ह पर सुजन ही नहीं थी वरन् वे घाव बन गए थे।

6मैं बहुत दुःखी हूँ और झुक गया हूँ;

7क्योंकि मेरी कमर में जलन है,

8मैं निर्बल और बहुत ही चूर हो गया हूँ;

9हे प्रभु मेरी सारी अभिलाषा तेरे सम्मुख है,

10मेरा हृदय धड़कता है,

11मेरे मित्र और मेरे संगी

12मेरे प्राण के ग्राहक मेरे लिये जाल बिछाते हैं,

13परन्तु मैं बहरे के समान सुनता ही नहीं,

14वरन् मैं ऐसे मनुष्य के तुल्य हूँ

15परन्तु हे यहोवा,

16क्योंकि मैंने कहा,

17क्योंकि मैं तो अब गिरने ही पर हूँ;

18इसलिए कि मैं तो अपने अधर्म को प्रगट करूँगा,

19परन्तु मेरे शत्रु अनगिनत हैं,

20जो भलाई के बदले में बुराई करते हैं,

21हे यहोवा, मुझे छोड़ न दे!

22हे यहोवा, हे मेरे उद्धारकर्ता,

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भजन संहिता 38 — hindi:

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