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ज़बूर 93

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1रब बादशाह है, वह जलाल से मुलब्बस है। रब जलाल से मुलब्बस और क़ुदरत से कमरबस्ता है। यक़ीनन दुनिया मज़बूत बुनियाद पर क़ायम है, और वह नहीं डगमगाएगी।

2तेरा तख़्त क़दीम ज़माने से क़ायम है, तू अज़ल से मौजूद है।

3ऐ रब, सैलाब गरज उठे, सैलाब शोर मचाकर गरज उठे, सैलाब ठाठें मारकर गरज उठे।

4लेकिन एक है जो गहरे पानी के शोर से ज़्यादा ज़ोरावर, जो समुंदर की ठाठों से ज़्यादा ताक़तवर है। रब जो बुलंदियों पर रहता है कहीं ज़्यादा अज़ीम है।

5ऐ रब, तेरे अहकाम हर तरह से क़ाबिले-एतमाद हैं। तेरा घर हमेशा तक क़ुद्दूसियत से आरास्ता रहेगा।

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ज़बूर 93 — urdu:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019Kitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس