1आसफ़ का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तर्ज़ : अहद के सोसन।
2इफ़राईम, बिनयमीन और मनस्सी के सामने अपनी क़ुदरत को हरकत में ला। हमें बचाने आ!
3ऐ अल्लाह, हमें बहाल कर। अपने चेहरे का नूर चमका तो हम नजात पाएँगे।
4ऐ रब, लशकरों के ख़ुदा, तेरा ग़ज़ब कब तक भड़कता रहेगा, हालाँकि तेरी क़ौम तुझसे इल्तिजा कर रही है?
5तूने उन्हें आँसुओं की रोटी खिलाई और आँसुओं का प्याला ख़ूब पिलाया।
6तूने हमें पड़ोसियों के झगड़ों का निशाना बनाया। हमारे दुश्मन हमारा मज़ाक़ उड़ाते हैं।
7ऐ लशकरों के ख़ुदा, हमें बहाल कर। अपने चेहरे का नूर चमका तो हम नजात पाएँगे।
8अंगूर की जो बेल मिसर में उग रही थी उसे तू उखाड़कर मुल्के-कनान लाया। तूने वहाँ की अक़वाम को भगाकर यह बेल उनकी जगह लगाई।
9तूने उसके लिए ज़मीन तैयार की तो वह जड़ पकड़कर पूरे मुल्क में फैल गई।
10उसका साया पहाड़ों पर छा गया, और उस की शाख़ों ने देवदार के अज़ीम दरख़्तों को ढाँक लिया।
11उस की टहनियाँ मग़रिब में समुंदर तक फैल गईं, उस की डालियाँ मशरिक़ में दरियाए-फ़ुरात तक पहुँच गईं।
12तूने उस की चारदीवारी क्यों गिरा दी? अब हर गुज़रनेवाला उसके अंगूर तोड़ लेता है।
13जंगल के सुअर उसे खा खाकर तबाह करते, खुले मैदान के जानवर वहाँ चरते हैं।
14ऐ लशकरों के ख़ुदा, हमारी तरफ़ दुबारा रुजू फ़रमा! आसमान से नज़र डालकर हालात पर ध्यान दे। इस बेल की देख-भाल कर।
15उसे महफ़ूज़ रख जिसे तेरे दहने हाथ ने ज़मीन में लगाया, उस बेटे को जिसे तूने अपने लिए पाला है।
16इस वक़्त वह कटकर नज़रे-आतिश हुआ है। तेरे चेहरे की डाँट-डपट से लोग हलाक हो जाते हैं।
17तेरा हाथ अपने दहने हाथ के बंदे को पनाह दे, उस आदमज़ाद को जिसे तूने अपने लिए पाला था।
18तब हम तुझसे दूर नहीं हो जाएंगे। बख़्श दे कि हमारी जान में जान आए तो हम तेरा नाम पुकारेंगे।
19ऐ रब, लशकरों के ख़ुदा, हमें बहाल कर। अपने चेहरे का नूर चमका तो हम नजात पाएँगे।