We Believe JesusFé, Esperança e Nova Vida

ज़बूर 67

किताबे-मुक़द्दस · urdu

← ज़बूर 66 ज़बूर ज़बूर 68 →

1ज़बूर। तारदार साज़ों के साथ गाना है। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए।

2ताकि ज़मीन पर तेरी राह और तमाम क़ौमों में तेरी नजात मालूम हो जाए।

3ऐ अल्लाह, क़ौमें तेरी सताइश करें, तमाम क़ौमें तेरी सताइश करें।

4उम्मतें शादमान होकर ख़ुशी के नारे लगाएँ, क्योंकि तू इनसाफ़ से क़ौमों की अदालत करेगा और ज़मीन पर उम्मतों की क़ियादत करेगा। (सिलाह)

5ऐ अल्लाह, क़ौमें तेरी सताइश करें, तमाम क़ौमें तेरी सताइश करें।

6ज़मीन अपनी फ़सलें देती है। अल्लाह हमारा ख़ुदा हमें बरकत दे!

7अल्लाह हमें बरकत दे, और दुनिया की इंतहाएँ सब उसका ख़ौफ़ मानें।

← ज़बूर 66 ज़बूर ज़बूर 68 →

ज़बूर 67 — urdu:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019Kitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس