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ज़बूर 2

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1अक़वाम क्यों तैश में आ गई हैं? उम्मतें क्यों बेकार साज़िशें कर रही हैं?

2दुनिया के बादशाह उठ खड़े हुए, हुक्मरान रब और उसके मसीह के ख़िलाफ़ जमा हो गए हैं।

3वह कहते हैं, “आओ, हम उनकी ज़ंजीरों को तोड़कर आज़ाद हो जाएँ, उनके रस्सों को दूर तक फेंक दें।”

4लेकिन जो आसमान पर तख़्तनशीन है वह हँसता है, रब उनका मज़ाक़ उड़ाता है।

5फिर वह ग़ुस्से से उन्हें डाँटता, अपना शदीद ग़ज़ब उन पर नाज़िल करके उन्हें डराता है।

6वह फ़रमाता है, “मैंने ख़ुद अपने बादशाह को अपने मुक़द्दस पहाड़ सिय्यून पर मुक़र्रर किया है!”

7आओ, मैं रब का फ़रमान सुनाऊँ। उसने मुझसे कहा, “तू मेरा बेटा है, आज मैं तेरा बाप बन गया हूँ।

8मुझसे माँग तो मैं तुझे मीरास में तमाम अक़वाम अता करूँगा, दुनिया की इंतहा तक सब कुछ बख़्श दूँगा।

9तू उन्हें लोहे के शाही असा से पाश पाश करेगा, उन्हें मिट्टी के बरतनों की तरह चकनाचूर करेगा।”

10चुनाँचे ऐ बादशाहो, समझ से काम लो! ऐ दुनिया के हुक्मरानो, तरबियत क़बूल करो!

11ख़ौफ़ करते हुए रब की ख़िदमत करो, लरज़ते हुए ख़ुशी मनाओ।

12बेटे को बोसा दो, ऐसा न हो कि वह ग़ुस्से हो जाए और तुम रास्ते में ही हलाक हो जाओ। क्योंकि वह एकदम तैश में आ जाता है। मुबारक हैं वह सब जो उसमें पनाह लेते हैं।

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ज़बूर 2 — urdu:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019Kitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس