We Believe JesusFé, Esperança e Nova Vida

ज़बूर 122

किताबे-मुक़द्दस · urdu

← ज़बूर 121 ज़बूर ज़बूर 123 →

1दाऊद का ज़ियारत का गीत।

2ऐ यरूशलम, अब हमारे पाँव तेरे दरवाज़ों में खड़े हैं।

3यरूशलम शहर यों बनाया गया है कि उसके तमाम हिस्से मज़बूती से एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।

4वहाँ क़बीले, हाँ रब के क़बीले हाज़िर होते हैं ताकि रब के नाम की सताइश करें जिस तरह इसराईल को फ़रमाया गया है।

5क्योंकि वहाँ तख़्ते-अदालत करने के लिए लगाए गए हैं, वहाँ दाऊद के घराने के तख़्त हैं।

6यरूशलम के लिए सलामती माँगो! “जो तुझसे प्यार करते हैं वह सुकून पाएँ।

7तेरी फ़सील में सलामती और तेरे महलों में सुकून हो।”

8अपने भाइयों और हमसायों की ख़ातिर मैं कहूँगा, “तेरे अंदर सलामती हो!”

9रब हमारे ख़ुदा के घर की ख़ातिर मैं तेरी ख़ुशहाली का तालिब रहूँगा।

← ज़बूर 121 ज़बूर ज़बूर 123 →

ज़बूर 122 — urdu:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019Kitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس