1दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तर्ज़ : शमीनीत।
2आपस में सब झूट बोलते हैं। उनकी ज़बान पर चिकनी-चुपड़ी बातें होती हैं जबकि दिल में कुछ और ही होता है।
3रब तमाम चिकनी-चुपड़ी और शेख़ीबाज़ ज़बानों को काट डाले!
4वह उन सबको मिटा दे जो कहते हैं, “हम अपनी लायक़ ज़बान के बाइस ताक़तवर हैं। हमारे होंट हमें सहारा देते हैं तो कौन हमारा मालिक होगा? कोई नहीं!”
5लेकिन रब फ़रमाता है, “नाचारों पर तुम्हारे ज़ुल्म की ख़बर और ज़रूरतमंदों की कराहती आवाज़ें मेरे सामने आई हैं। अब मैं उठकर उन्हें उनसे छुटकारा दूँगा जो उनके ख़िलाफ़ फुँकारते हैं।”
6रब के फ़रमान पाक हैं, वह भट्टी में सात बार साफ़ की गई चाँदी की मानिंद ख़ालिस हैं।
7ऐ रब, तू ही उन्हें महफ़ूज़ रखेगा, तू ही उन्हें अबद तक इस नसल से बचाए रखेगा,
8गो बेदीन आज़ादी से इधर उधर फिरते हैं, और इनसानों के दरमियान कमीनापन का राज है।