1दाऊद का ज़बूर।
2रब सिय्यून से तेरी सलतनत की सरहद्दें बढ़ाकर कहेगा, “आस-पास के दुश्मनों पर हुकूमत कर!”
3जिस दिन तू अपनी फ़ौज को खड़ा करेगा तेरी क़ौम ख़ुशी से तेरे पीछे हो लेगी। तू मुक़द्दस शानो-शौकत से आरास्ता होकर तुलूए-सुबह के बातिन से अपनी जवानी की ओस पाएगा।
4रब ने क़सम खाई है और इससे पछताएगा नहीं, “तू अबद तक इमाम है, ऐसा इमाम जैसा मलिके-सिद्क़ था।”
5रब तेरे दहने हाथ पर रहेगा और अपने ग़ज़ब के दिन दीगर बादशाहों को चूर चूर करेगा।
6वह क़ौमों में अदालत करके मैदान को लाशों से भर देगा और दूर तक सरों को पाश पाश करेगा।
7रास्ते में वह नदी से पानी पी लेगा, इसलिए अपना सर उठाए फिरेगा।