1उसी साल के पाँचवें महीने जुलाई ता अगस्त। में जिबऊन का रहनेवाला नबी हननियाह बिन अज़्ज़ूर रब के घर में आया। उस वक़्त यानी सिदक़ियाह की हुकूमत के चौथे साल में वह इमामों और क़ौम की मौजूदगी में मुझसे मुख़ातिब हुआ,
2“रब्बुल-अफ़वाज जो इसराईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैं शाहे-बाबल का जुआ तोड़ डालूँगा।
3दो साल के अंदर अंदर मैं रब के घर का वह सारा सामान इस जगह वापस पहुँचाऊँगा जो शाहे-बाबल नबूकदनज़्ज़र यहाँ से निकालकर बाबल ले गया था।
4उस वक़्त मैं यहूदाह के बादशाह यहूयाकीन इबरानी में यहूयाकीन का मुतरादिफ़ यकूनियाह मुस्तामल है। बिन यहूयक़ीम और यहूदाह के दीगर तमाम जिलावतनों को भी बाबल से वापस लाऊँगा। क्योंकि मैं यक़ीनन शाहे-बाबल का जुआ तोड़ डालूँगा। यह रब का फ़रमान है।”
5यह सुनकर यरमियाह ने इमामों और रब के घर में खड़े बाक़ी परस्तारों की मौजूदगी में हननियाह नबी से कहा,
6“आमीन! रब ऐसा ही करे, वह तेरी पेशगोई पूरी करके रब के घर का सामान और तमाम जिलावतनों को बाबल से इस जगह वापस लाए।
7लेकिन उस पर तवज्जुह दे जो मैं तेरी और पूरी क़ौम की मौजूदगी में बयान करता हूँ!
8क़दीम ज़माने से लेकर आज तक जितने नबी मुझसे और तुझसे पहले ख़िदमत करते आए हैं उन्होंने मुतअद्दिद मुल्कों और बड़ी बड़ी सलतनतों के बारे में नबुव्वत की थी कि उन पर जंग, आफ़त और मोहलक बीमारियाँ नाज़िल होंगी।
9चुनाँचे ख़बरदार! जो नबी सलामती की पेशगोई करे उस की तसदीक़ उस वक़्त होगी जब उस की पेशगोई पूरी हो जाएगी। उसी वक़्त लोग जान लेंगे कि उसे वाक़ई रब की तरफ़ से भेजा गया है।”
10तब हननियाह ने लकड़ी के जुए को यरमियाह की गरदन पर से उतारकर उसे तोड़ दिया।
11तमाम लोगों के सामने उसने कहा, “रब फ़रमाता है कि दो साल के अंदर अंदर मैं इसी तरह शाहे-बाबल नबूकदनज़्ज़र का जुआ तमाम क़ौमों की गरदन पर से उतारकर तोड़ डालूँगा।” तब यरमियाह वहाँ से चला गया।
12इस वाक़िये के थोड़ी देर बाद रब यरमियाह से हमकलाम हुआ,
13“जा, हननियाह को बता, ‘रब फ़रमाता है कि तूने लकड़ी का जुआ तो तोड़ दिया है, लेकिन उस की जगह तूने अपनी गरदन पर लोहे का जुआ रख लिया है।’
14क्योंकि रब्बुल-अफ़वाज जो इसराईल का ख़ुदा है फ़रमाता है कि मैंने लोहे का जुआ इन तमाम क़ौमों पर रख दिया है ताकि वह नबूकदनज़्ज़र की ख़िदमत करें। और न सिर्फ़ यह उस की ख़िदमत करेंगे बल्कि मैं जंगली जानवरों को भी उसके हाथ में कर दूँगा।”
15फिर यरमियाह ने हननियाह से कहा, “ऐ हननियाह, सुन! गो रब ने तुझे नहीं भेजा तो भी तूने इस क़ौम को झूट पर भरोसा रखने पर आमादा किया है।
16इसलिए रब फ़रमाता है, ‘मैं तुझे रूए-ज़मीन पर से मिटाने को हूँ। इसी साल तू मर जाएगा, इसलिए कि तूने रब से सरकश होने का मशवरा दिया है’।”
17और ऐसा ही हुआ। उसी साल के सातवें महीने सितंबर ता अक्तूबर। यानी दो महीने के बाद हननियाह नबी कूच कर गया।