1फिर मैंने अल्लाह की बुलंद आवाज़ सुनी, “यरूशलम की अदालत क़रीब आ गई है! आओ, हर एक अपना तबाहकुन हथियार पकड़कर खड़ा हो जाए!”
2तब छः आदमी रब के घर के शिमाली दरवाज़े में दाख़िल हुए। हर एक अपना तबाहकुन हथियार थामे चल रहा था। उनके साथ एक और आदमी था जिसका लिबास कतान का था। उसके पटके से कातिब का सामान लटका हुआ था। यह आदमी क़रीब आकर पीतल की क़ुरबानगाह के पास खड़े हो गए।
3इसराईल के ख़ुदा का जलाल अब तक करूबी फ़रिश्तों के ऊपर ठहरा हुआ था। अब वह वहाँ से उड़कर रब के घर की दहलीज़ के पास रुक गया। फिर रब कतान से मुलब्बस उस मर्द से हमकलाम हुआ जिसके पटके से कातिब का सामान लटका हुआ था।
4उसने फ़रमाया, “जा, यरूशलम शहर में से गुज़रकर हर एक के माथे पर निशान लगा दे जो बाशिंदों की तमाम मकरूह हरकतों को देखकर आहो-ज़ारी करता है।”
5मेरे सुनते सुनते रब ने दीगर आदमियों से कहा, “पहले आदमी के पीछे पीछे चलकर लोगों को मार डालो! न किसी पर तरस खाओ, न रहम करो
6बल्कि बुज़ुर्गों को कुँवारे-कुँवारियों और बाल-बच्चों समेत मौत के घाट उतारो। सिर्फ़ उन्हें छोड़ना जिनके माथे पर निशान है। मेरे मक़दिस से शुरू करो!”
7फिर रब उनसे दुबारा हमकलाम हुआ, “रब के घर के सहनों को मक़तूलों से भरकर उस की बेहुरमती करो, फिर वहाँ से निकल जाओ!” वह निकल गए और शहर में से गुज़रकर लोगों को मार डालने लगे।
8रब के घर के सहन में सिर्फ़ मुझे ही ज़िंदा छोड़ा गया था।
9रब ने जवाब दिया, “इसराईल और यहूदाह के लोगों का क़ुसूर निहायत ही संगीन है। मुल्क में क़त्लो-ग़ारत आम है, और शहर नाइनसाफ़ी से भर गया है। क्योंकि लोग कहते हैं, ‘रब ने मुल्क को तर्क किया है, हम उसे नज़र ही नहीं आते।’
10इसलिए न मैं उन पर तरस खाऊँगा, न रहम करूँगा बल्कि उनकी हरकतों की मुनासिब सज़ा उनके सरों पर लाऊँगा।”
11फिर कतान से मुलब्बस वह आदमी लौट आया जिसके पटके से कातिब का सामान लटका हुआ था। उसने इत्तला दी, “जो कुछ तूने फ़रमाया वह मैंने पूरा किया है।”