1यहूदाह के जुनूब में वह इलाक़ा होगा जो तुम्हें मेरे लिए अलग करना है। क़बायली इलाक़ों की तरह उसका भी एक सिरा मुल्क की मशरिक़ी सरहद और दूसरा सिरा मग़रिबी सरहद होगा। शिमाल से जुनूब तक का फ़ासला साढ़े 12 किलोमीटर है। उसके बीच में मक़दिस है।
2इस इलाक़े के दरमियान एक ख़ास ख़ित्ता होगा। मशरिक़ से मग़रिब तक उसका फ़ासला साढ़े 12 किलोमीटर होगा जबकि शिमाल से जुनूब तक फ़ासला 10 किलोमीटर होगा। रब के लिए मख़सूस इस ख़ित्ते
3का एक हिस्सा इमामों के लिए मख़सूस होगा। इस हिस्से का फ़ासला मशरिक़ से मग़रिब तक साढ़े 12 किलोमीटर और शिमाल से जुनूब तक 5 किलोमीटर होगा। इसके बीच में ही रब का मक़दिस होगा।
4यह मुक़द्दस इलाक़ा लावी के ख़ानदान सदोक़ के मख़सूसो-मुक़द्दस किए गए इमामों को दिया जाएगा। क्योंकि जब इसराईली मुझसे बरगश्ता हुए तो बाक़ी लावी उनके साथ भटक गए, लेकिन सदोक़ का ख़ानदान वफ़ादारी से मेरी ख़िदमत करता रहा।
5इसलिए उन्हें मेरे लिए मख़सूस इलाक़े का मुक़द्दसतरीन हिस्सा मिलेगा। यह लावियों के ख़ित्ते के शिमाल में होगा।
6इमामों के जुनूब में बाक़ी लावियों का ख़ित्ता होगा। मशरिक़ से मग़रिब तक उसका फ़ासला साढ़े 12 किलोमीटर और शिमाल से जुनूब तक 5 किलोमीटर होगा।
7रब के लिए मख़सूस यह इलाक़ा पूरे मुल्क का बेहतरीन हिस्सा है। उसका कोई भी प्लाट किसी दूसरे के हाथ में देने की इजाज़त नहीं। उसे न बेचा जाए, न किसी दूसरे को किसी प्लाट के एवज़ में दिया जाए। क्योंकि यह इलाक़ा रब के लिए मख़सूसो-मुक़द्दस है।
8रब के मक़दिस के इस ख़ास इलाक़े के जुनूब में एक और ख़ित्ता होगा जिसकी लंबाई साढ़े 12 किलोमीटर और चौड़ाई अढ़ाई किलोमीटर है। वह मुक़द्दस नहीं है बल्कि आम लोगों की रिहाइश के लिए होगा। इसके बीच में शहर होगा, जिसके इर्दगिर्द चरागाहें होंगी।
9यह शहर मुरब्बा शक्ल का होगा। लंबाई और चौड़ाई दोनों सवा दो दो किलोमीटर होगी।
10शहर के चारों तरफ़ जानवरों को चराने की खुली जगह होगी जिसकी चौड़ाई 133 मीटर होगी।
11चूँकि शहर अपने ख़ित्ते के बीच में होगा इसलिए मज़कूरा खुली जगह के मशरिक़ में एक ख़ित्ता बाक़ी रह जाएगा जिसका मशरिक़ से शहर तक फ़ासला 5 किलोमीटर और शिमाल से जुनूब तक फ़ासला अढ़ाई किलोमीटर होगा। शहर के मग़रिब में भी इतना ही बड़ा ख़ित्ता होगा। इन दो ख़ित्तों में खेतीबाड़ी की जाएगी जिसकी पैदावार शहर में काम करनेवालों की ख़ुराक होगी।
12शहर में काम करनेवाले तमाम क़बीलों के होंगे। वही इन खेतों की खेतीबाड़ी करेंगे।
13चुनाँचे मेरे लिए अलग किया गया यह पूरा इलाक़ा मुरब्बा शक्ल का है। उस की लंबाई और चौड़ाई साढ़े बारह बारह किलोमीटर है। इसमें शहर भी शामिल है।
14जद के क़बीले की जुनूबी सरहद मुल्क की सरहद भी है। वह तमर से जुनूब-मग़रिब में मरीबा-क़ादिस के चश्मों तक चलती है, फिर मिसर की सरहद यानी वादीए-मिसर के साथ साथ शिमाल-मग़रिब का रुख़ करके बहीराए-रूम तक पहुँचती है।
15रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि यही तुम्हारा मुल्क होगा! उसे इसराईली क़बीलों में तक़सीम करो। जो कुछ भी उन्हें क़ुरा डालकर मिले वह उनकी मौरूसी ज़मीन होगी।
16फ़सील की पूरी लंबाई 9 किलोमीटर है।