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हिज़क़ियेल 35

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1रब मुझसे हमकलाम हुआ,

2“ऐ आदमज़ाद, सईर के पहाड़ी इलाक़े की तरफ़ रुख़ करके उसके ख़िलाफ़ नबुव्वत कर!

3उसे बता,

4मैं तेरे शहरों को मलबे के ढेर बना दूँगा, और तू सरासर उजड़ जाएगा। तब तू जान लेगा कि मैं ही रब हूँ।

5तू हमेशा इसराईलियों का सख़्त दुश्मन रहा है, और जब उन पर आफ़त आई और उनकी सज़ा उरूज तक पहुँची तो तू भी तलवार लेकर उन पर टूट पड़ा।

6इसलिए रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि मेरी हयात की क़सम, मैं तुझे क़त्लो-ग़ारत के हवाले करूँगा, और क़त्लो-ग़ारत तेरा ताक़्क़ुब करती रहेगी। चूँकि तूने क़त्लो-ग़ारत करने से नफ़रत न की, इसलिए क़त्लो-ग़ारत तेरे पीछे पड़ी रहेगी।

7मैं सईर के पहाड़ी इलाक़े को वीरानो-सुनसान करके वहाँ के तमाम आने जानेवालों को मिटा डालूँगा।

8तेरे पहाड़ी इलाक़े को मैं मक़तूलों से भर दूँगा। तलवार की ज़द में आनेवाले हर तरफ़ पड़े रहेंगे। तेरी पहाड़ियों, वादियों और तमाम घाटियों में लाशें नज़र आएँगी।

9मेरे हुक्म पर तू अबद तक वीरान रहेगा, और तेरे शहर ग़ैरआबाद रहेंगे। तब तू जान लेगा कि मैं ही रब हूँ।

10तू बोला, “इसराईल और यहूदाह की दोनों क़ौमें अपने इलाक़ों समेत मेरी ही हैं! आओ हम उन पर क़ब्ज़ा करें।” तुझे ख़याल तक नहीं आया कि रब वहाँ मौजूद है।

11इसलिए रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि मेरी हयात की क़सम, मैं तुझसे वही सुलूक करूँगा जो तूने उनसे किया जब तूने ग़ुस्से और हसद के आलम में उन पर अपनी पूरी नफ़रत का इज़हार किया। लेकिन उन्हीं पर मैं अपने आपको ज़ाहिर करूँगा जब मैं तेरी अदालत करूँगा।

12उस वक़्त तू जान लेगा कि मैं, रब ने वह तमाम कुफ़र सुन लिया है जो तूने इसराईल के पहाड़ों के ख़िलाफ़ बका है। क्योंकि तूने कहा, “यह उजड़ गए हैं, अब यह हमारे क़ब्ज़े में आ गए हैं और हम उन्हें खा सकते हैं।”

13तूने शेख़ी मार मारकर मेरे ख़िलाफ़ कुफ़र बका है, लेकिन ख़बरदार! मैंने इन तमाम बातों पर तवज्जुह दी है।

14रब क़ादिरे-मुतलक़ फ़रमाता है कि तूने ख़ुशी मनाई कि पूरा मुल्क वीरानो-सुनसान है, लेकिन मैं तुझे भी उतना ही वीरान कर दूँगा।

15तू कितना ख़ुश हुआ जब इसराईल की मौरूसी ज़मीन उजड़ गई! अब मैं तेरे साथ भी ऐसा ही करूँगा। ऐ सईर के पहाड़ी इलाक़े, तू पूरे अदोम समेत वीरानो-सुनसान हो जाएगा। तब वह जान लेंगे कि मैं ही रब हूँ।’

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हिज़क़ियेल 35 — urdu:

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