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गलतियों 4

किताबे-मुक़द्दस · urdu

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1देखें, जो बेटा अपने बाप की मिलकियत का वारिस है वह उस वक़्त तक ग़ुलामों से फ़रक़ नहीं जब तक वह बालिग़ न हो, हालाँकि वह पूरी मिलकियत का मालिक है।

2बाप की तरफ़ से मुक़र्रर की हुई उम्र तक दूसरे उस की देख-भाल करते और उस की मिलकियत सँभालते हैं।

3इसी तरह हम भी जब बच्चे थे दुनिया की कुव्वतों के ग़ुलाम थे।

4लेकिन जब मुक़र्ररा वक़्त आ गया तो अल्लाह ने अपने फ़रज़ंद को भेज दिया। एक औरत से पैदा होकर वह शरीअत के ताबे हुआ

5ताकि फ़िद्या देकर हमें जो शरीअत के ताबे थे आज़ाद कर दे। यों हमें अल्लाह के फ़रज़ंद होने का मरतबा मिला है।

6अब चूँकि आप उसके फ़रज़ंद हैं इसलिए अल्लाह ने अपने फ़रज़ंद के रूह को हमारे दिलों में भेज दिया, वह रूह जो “अब्बा” यानी “ऐ बाप” कहकर पुकारता रहता है।

7ग़रज़ अब आप ग़ुलाम न रहे बल्कि बेटे की हैसियत रखते हैं। और बेटा होने का यह मतलब है कि अल्लाह ने आपको वारिस भी बना दिया है।

8माज़ी में जब आप अल्लाह को नहीं जानते थे तो आप उनके ग़ुलाम थे जो हक़ीक़त में ख़ुदा नहीं हैं।

9लेकिन अब आप अल्लाह को जानते हैं, बल्कि अब अल्लाह ने आपको जान लिया है। तो फिर आप मुड़कर इन कमज़ोर और घटिया उसूलों की तरफ़ क्यों वापस जाने लगे हैं? क्या आप दुबारा इनकी ग़ुलामी में आना चाहते हैं?

10आप बड़ी फ़िकरमंदी से ख़ास दिन, माह, मौसम और साल मनाते हैं।

11मुझे आपके बारे में डर है, कहीं मेरी आप पर मेहनत-मशक़्क़त ज़ाया न जाए।

12भाइयो, मैं आपसे इल्तिजा करता हूँ कि मेरी मानिंद बन जाएँ, क्योंकि मैं तो आपकी मानिंद बन गया हूँ। आपने मेरे साथ कोई ग़लत सुलूक नहीं किया।

13आपको मालूम है कि जब मैंने पहली दफ़ा आपको अल्लाह की ख़ुशख़बरी सुनाई तो इसकी वजह मेरे जिस्म की कमज़ोर हालत थी।

14लेकिन अगरचे मेरी यह हालत आपके लिए आज़माइश का बाइस थी तो भी आपने मुझे हक़ीर न जाना, न मुझे नीच समझा, बल्कि आपने मुझे यों ख़ुशआमदीद कहा जैसा कि मैं अल्लाह का कोई फ़रिश्ता या मसीह ईसा ख़ुद हूँ।

15उस वक़्त आप इतने ख़ुश थे! अब क्या हुआ है? मैं गवाह हूँ, उस वक़्त अगर आपको मौक़ा मिलता तो आप अपनी आँखें निकालकर मुझे दे देते।

16तो क्या अब मैं आपको हक़ीक़त बताने की वजह से आपका दुश्मन बन गया हूँ?

17वह दूसरे लोग आपकी दोस्ती पाने की पूरी जिद्दो-जहद कर रहे हैं, लेकिन उनकी नीयत साफ़ नहीं है। बस वह आपको मुझसे जुदा करना चाहते हैं ताकि आप उन्हीं के हक़ में जिद्दो-जहद करते रहें।

18जब लोग आपकी दोस्ती पाने की जिद्दो-जहद करते हैं तो यह है तो ठीक, लेकिन इसका मक़सद अच्छा होना चाहिए। हाँ, सहीह जिद्दो-जहद हर वक़्त अच्छी होती है, न सिर्फ़ इस वक़्त जब मैं आपके दरमियान हूँ।

19मेरे प्यारे बच्चो! अब मैं दुबारा आपको जन्म देने का-सा दर्द महसूस कर रहा हूँ और उस वक़्त तक करता रहूँगा जब तक मसीह आपमें सूरत न पकड़े।

20काश मैं उस वक़्त आपके पास होता ताकि फ़रक़ अंदाज़ में आपसे बात कर सकता, क्योंकि मैं आपके सबब से बड़ी उलझन में हूँ!

21आप जो शरीअत के ताबे रहना चाहते हैं मुझे एक बात बताएँ, क्या आप वह बात नहीं सुनते जो शरीअत कहती है?

22वह कहती है कि इब्राहीम के दो बेटे थे। एक लौंडी का बेटा था, एक आज़ाद औरत का।

23लौंडी के बेटे की पैदाइश हसबे-मामूल थी, लेकिन आज़ाद औरत के बेटे की पैदाइश ग़ैरमामूली थी, क्योंकि उसमें अल्लाह का वादा पूरा हुआ।

24जब यह किनायतन समझा जाए तो यह दो ख़वातीन अल्लाह के दो अहदों की नुमाइंदगी करती हैं। पहली ख़ातून हाजिरा सीना पहाड़ पर बँधे हुए अहद की नुमाइंदगी करती है, और जो बच्चे उससे पैदा होते हैं वह ग़ुलामी के लिए मुक़र्रर हैं।

25हाजिरा जो अरब में वाक़े पहाड़ सीना की अलामत है मौजूदा शहर यरूशलम से मुताबिक़त रखती है। वह और उसके तमाम बच्चे ग़ुलामी में ज़िंदगी गुज़ारते हैं।

26लेकिन आसमानी यरूशलम आज़ाद है और वही हमारी माँ है।

27क्योंकि कलामे-मुक़द्दस में लिखा है,

28भाइयो, आप इसहाक़ की तरह अल्लाह के वादे के फ़रज़ंद हैं।

29उस वक़्त इसमाईल ने जो हसबे-मामूल पैदा हुआ था इसहाक़ को सताया जो रूहुल-क़ुद्स की क़ुदरत से पैदा हुआ था। आज भी ऐसा ही है।

30लेकिन कलामे-मुक़द्दस में क्या फ़रमाया गया है? “इस लौंडी और इसके बेटे को घर से निकाल दें, क्योंकि वह आज़ाद औरत के बेटे के साथ विरसा नहीं पाएगा।”

31ग़रज़ भाइयो, हम लौंडी के फ़रज़ंद नहीं हैं बल्कि आज़ाद औरत के।

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