1असल में इसकी ज़रूरत नहीं कि मैं आपको उस काम के बारे में लिखूँ जो हमें यहूदिया के मुक़द्दसीन की ख़िदमत में करना है।
2क्योंकि मैं आपकी गरमजोशी जानता हूँ, और मैं मकिदुनिया के ईमानदारों के सामने आप पर फ़ख़र करता रहा हूँ कि “अख़या के लोग पिछले साल से देने के लिए तैयार थे।” यों आपकी सरगरमी ने ज़्यादातर लोगों को ख़ुद देने के लिए उभारा।
3अब मैंने इन भाइयों को भेज दिया है ताकि हमारा आप पर फ़ख़र बेबुनियाद न निकले बल्कि जिस तरह मैंने कहा था आप तैयार रहें।
4ऐसा न हो कि जब मैं मकिदुनिया के कुछ भाइयों को साथ लेकर आपके पास पहुँचूँगा तो आप तैयार न हूँ। उस वक़्त मैं, बल्कि आप भी शरमिंदा होंगे कि मैंने आप पर इतना एतमाद किया है।
5इसलिए मैंने इस बात पर ज़ोर देना ज़रूरी समझा कि भाई पहले ही आपके पास आकर उस हदिये का इंतज़ाम करें जिसका वादा आपने किया है। क्योंकि मैं चाहता हूँ कि मेरे आने तक यह हदिया जमा किया गया हो और ऐसा न लगे जैसा इसे मुश्किल से आपसे निकालना पड़ा। इसके बजाए आपकी सख़ावत ज़ाहिर हो जाए।
6याद रहे कि जो शख़्स बीज को बचा बचाकर बोता है उस की फ़सल भी उतनी कम होगी। लेकिन जो बहुत बीज बोता है उस की फ़सल भी बहुत ज़्यादा होगी।
7हर एक उतना दे जितना देने के लिए उसने पहले अपने दिल में ठहरा लिया है। वह इसमें तकलीफ़ या मजबूरी महसूस न करे, क्योंकि अल्लाह उससे मुहब्बत रखता है जो ख़ुशी से देता है।
8और अल्लाह इस क़ाबिल है कि आपको आपकी ज़रूरियात से कहीं ज़्यादा दे। फिर आपके पास हर वक़्त और हर लिहाज़ से काफ़ी होगा बल्कि इतना ज़्यादा कि आप हर क़िस्म का नेक काम कर सकेंगे।
9चुनाँचे कलामे-मुक़द्दस में यह भी लिखा है, “उसने फ़ैयाज़ी से ज़रूरतमंदों में ख़ैरात बिखेर दी, उस की रास्तबाज़ी हमेशा तक क़ायम रहेगी।”
10ख़ुदा ही बीज बोनेवाले को बीज मुहैया करता और उसे खाने के लिए रोटी देता है। और वह आपको भी बीज देकर उसमें इज़ाफ़ा करेगा और आपकी रास्तबाज़ी की फ़सल उगने देगा।
11हाँ, वह आपको हर लिहाज़ से दौलतमंद बना देगा और आप हर मौक़े पर फ़ैयाज़ी से दे सकेंगे। चुनाँचे जब हम आपका हदिया उनके पास ले जाएंगे जो ज़रूरतमंद हैं तो वह ख़ुदा का शुक्र करेंगे।
12यों आप न सिर्फ़ मुक़द्दसीन की ज़रूरियात पूरी करेंगे बल्कि वह आपकी इस ख़िदमत से इतने मुतअस्सिर हो जाएंगे कि वह बड़े जोश से ख़ुदा का भी शुक्रिया अदा करेंगे।
13आपकी ख़िदमत के नतीजे में वह अल्लाह को जलाल देंगे। क्योंकि आपकी उन पर और तमाम ईमानदारों पर सख़ावत का इज़हार साबित करेगा कि आप मसीह की ख़ुशख़बरी न सिर्फ़ तसलीम करते हैं बल्कि उसके ताबे भी रहते हैं।
14और जब वह आपके लिए दुआ करेंगे तो आपके आरज़ूमंद रहेंगे, इसलिए कि अल्लाह ने आपको कितना बड़ा फ़ज़ल दे दिया है।
15अल्लाह का उस की नाक़ाबिले-बयान बख़्शिश के लिए शुक्र हो!