1उन दिनों में समुएल फ़ौत हुआ। तमाम इसराईल रामा में जनाज़े के लिए जमा हुआ। उसका मातम करते हुए उन्होंने उसे उस की ख़ानदानी क़ब्र में दफ़न किया।
2तो उसने 10 जवानों को भेजकर कहा, “करमिल जाकर नाबाल से मिलें और उसे मेरा सलाम दें।
3उसे बताना, ‘अल्लाह आपको तवील ज़िंदगी अता करे। आप की, आपके ख़ानदान की और आपकी तमाम मिलकियत की सलामती हो।
4सुना है कि भेड़ों के बाल कतरने का वक़्त आ गया है। करमिल में आपके चरवाहे हमेशा हमारे साथ रहे। उस पूरे अरसे में न उन्हें हमारी तरफ़ से कोई नुक़सान पहुँचा, न कोई चीज़ चोरी हुई।
5अपने लोगों से ख़ुद पूछ लें! वह इसकी तसदीक़ करेंगे। आज आप ख़ुशी मना रहे हैं, इसलिए मेरे जवानों पर मेहरबानी करें। जो कुछ आप ख़ुशी से दे सकते हैं वह उन्हें और अपने बेटे दाऊद को दे दें’।”
6दाऊद के आदमी नाबाल के पास गए। उसे दाऊद का सलाम देकर उन्होंने उसका पैग़ाम दिया और फिर जवाब का इंतज़ार किया।
7लेकिन नाबाल ने करख़्त लहजे में कहा, “यह दाऊद कौन है? कौन है यस्सी का बेटा? आजकल बहुत-से ऐसे ग़ुलाम हैं जो अपने मालिक से भागे हुए हैं।
8मैं अपनी रोटी, अपना पानी और कतरनेवालों के लिए ज़बह किया गया गोश्त लेकर ऐसे आवारा फिरनेवालों को क्यों दे दूँ? क्या पता है कि यह कहाँ से आए हैं।”
9दाऊद के आदमी चले गए और दाऊद को सब कुछ बता दिया।
10तब दाऊद ने हुक्म दिया, “अपनी तलवारें बाँध लो!” सबने अपनी तलवारें बाँध लीं। उसने भी ऐसा किया और फिर 400 अफ़राद के साथ करमिल के लिए रवाना हुआ। बाक़ी 200 मर्द सामान के पास रहे।
11इतने में नाबाल के एक नौकर ने उस की बीवी को इत्तला दी, “दाऊद ने रेगिस्तान में से अपने क़ासिदों को नाबाल के पास भेजा ताकि उसे मुबारकबाद दें। लेकिन उसने जवाब में गरजकर उन्हें गालियाँ दी हैं,
12हालाँकि उन लोगों का हमारे साथ सुलूक हमेशा अच्छा रहा है। हम अकसर रेवड़ों को चराने के लिए उनके क़रीब फिरते रहे, तो भी उन्होंने हमें कभी नुक़सान न पहुँचाया, न कोई चीज़ चोरी की।
13जब भी हम उनके क़रीब थे तो वह दिन-रात चारदीवारी की तरह हमारी हिफ़ाज़त करते रहे।
14अब सोच लें कि क्या किया जाए! क्योंकि हमारा मालिक और उसके तमाम घरवाले बड़े ख़तरे में हैं। वह ख़ुद इतना शरीर है कि उससे बात करने का कोई फ़ायदा नहीं।”
15जितनी जल्दी हो सका अबीजेल ने कुछ सामान इकट्ठा किया जिसमें 200 रोटियाँ, मै की दो मशकें, खाने के लिए तैयार की गई पाँच भेड़ें, भुने हुए अनाज के साढ़े 27 किलोग्राम, किशमिश की 100 और अंजीर की 200 टिक्कियाँ शामिल थीं। सब कुछ गधों पर लादकर
16उसने अपने नौकरों को हुक्म दिया, “मेरे आगे निकल जाओ, मैं तुम्हारे पीछे पीछे आऊँगी।” अपने शौहर को उसने कुछ न बताया।
17जब अबीजेल पहाड़ की आड़ में उतरने लगी तो दाऊद अपने आदमियों समेत उस की तरफ़ बढ़ते हुए नज़र आया। फिर उनकी मुलाक़ात हुई।
18दाऊद तो अभी तक बड़े ग़ुस्से में था, क्योंकि वह सोच रहा था, “इस आदमी की मदद करने का क्या फ़ायदा था! हम रेगिस्तान में उसके रेवड़ों की हिफ़ाज़त करते रहे और उस की कोई भी चीज़ गुम न होने दी। तो भी उसने हमारी नेकी के जवाब में हमारी बेइज़्ज़ती की है।
19अल्लाह मुझे सख़्त सज़ा दे अगर मैं कल सुबह तक उसके एक आदमी को भी ज़िंदा छोड़ दूँ!”
20मेरे मालिक उस शरीर आदमी नाबाल पर ज़्यादा ध्यान न दें। उसके नाम का मतलब अहमक़ है और वह है ही अहमक़। अफ़सोस, मेरी उन आदमियों से मुलाक़ात नहीं हुई जो आपने हमारे पास भेजे थे।
21लेकिन रब की और आपकी हयात की क़सम, रब ने आपको अपने हाथों से बदला लेने और क़ातिल बनने से बचाया है। और अल्लाह करे कि जो भी आपसे दुश्मनी रखते और आपको नुक़सान पहुँचाना चाहते हैं उन्हें नाबाल की-सी सज़ा मिल जाए।
22अब गुज़ारिश है कि जो बरकत हमें मिली है उसमें आप भी शरीक हों। जो चीज़ें आपकी ख़ादिमा लाई है उन्हें क़बूल करके उन जवानों में तक़सीम कर दें जो मेरे आक़ा के पीछे हो लिए हैं।
23जो भी ग़लती हुई है अपनी ख़ादिमा को मुआफ़ कीजिए। रब ज़रूर मेरे आक़ा का घराना हमेशा तक क़ायम रखेगा, क्योंकि आप रब के दुश्मनों से लड़ते हैं। वह आपको जीते-जी ग़लतियाँ करने से बचाए रखे।
24जब कोई आपका ताक़्क़ुब करके आपको मार देने की कोशिश करे तो रब आपका ख़ुदा आपकी जान जानदारों की थैली में महफ़ूज़ रखेगा। लेकिन आपके दुश्मनों की जान वह फ़लाख़न के पत्थर की तरह दूर फेंककर हलाक कर देगा।
25जब रब अपने तमाम वादे पूरे करके आपको इसराईल का बादशाह बना देगा
26तो कोई ऐसी बात सामने नहीं आएगी जो ठोकर का बाइस हो। मेरे आक़ा का ज़मीर साफ़ होगा, क्योंकि आप बदला लेकर क़ातिल नहीं बने होंगे। गुज़ारिश है कि जब रब आपको कामयाबी दे तो अपनी ख़ादिमा को भी याद करें।”
27दाऊद बहुत ख़ुश हुआ। “रब इसराईल के ख़ुदा की तारीफ़ हो जिसने आज आपको मुझसे मिलने के लिए भेज दिया।
28आपकी बसीरत मुबारक है! आप मुबारक हैं, क्योंकि आपने मुझे इस दिन अपने हाथों से बदला लेकर क़ातिल बनने से रोक दिया है।
29रब इसराईल के ख़ुदा की क़सम जिसने मुझे आपको नुक़सान पहुँचाने से रोक दिया, कल सुबह नाबाल के तमाम आदमी हलाक होते अगर आप इतनी जल्दी से मुझसे मिलने न आतीं।”
30दाऊद ने अबीजेल की पेशकरदा चीज़ें क़बूल करके उसे रुख़सत किया और कहा, “सलामती से जाएँ। मैंने आपकी सुनी और आपकी बात मंज़ूर कर ली है।”
31जब अबीजेल अपने घर पहुँची तो देखा कि बहुत रौनक़ है, क्योंकि नाबाल बादशाह की-सी ज़ियाफ़त करके ख़ुशियाँ मना रहा था। चूँकि वह नशे में धुत था इसलिए अबीजेल ने उसे उस वक़्त कुछ न बताया।
32अगली सुबह जब नाबाल होश में आ गया तो अबीजेल ने उसे सब कुछ कह सुनाया। यह सुनते ही नाबाल को दौरा पड़ गया, और वह पत्थर-सा बन गया।
33दस दिन के बाद रब ने उसे मरने दिया।
34जब दाऊद को नाबाल की मौत की ख़बर मिल गई तो वह पुकारा, “रब की तारीफ़ हो जिसने मेरे लिए नाबाल से लड़कर मेरी बेइज़्ज़ती का बदला लिया है। उस की मेहरबानी है कि मैं ग़लत काम करने से बच गया हूँ जबकि नाबाल की बुराई उसके अपने सर पर आ गई है।”
35चुनाँचे उसके मुलाज़िम करमिल में अबीजेल के पास जाकर बोले, “दाऊद ने हमें शादी का पैग़ाम देकर भेजा है।”
36अबीजेल खड़ी हुई, फिर मुँह के बल झुककर बोली, “मैं उनकी ख़िदमत में हाज़िर हूँ। मैं अपने मालिक के ख़ादिमों के पाँव धोने तक तैयार हूँ।”
37वह जल्दी से तैयार हुई और गधे पर बैठकर दाऊद के मुलाज़िमों के साथ रवाना हुई। पाँच नौकरानियाँ उसके साथ चली गईं। यों अबीजेल दाऊद की बीवी बन गई।
38अब दाऊद की दो बीवियाँ थीं, क्योंकि पहले उस की शादी अख़ीनुअम से हुई थी जो यज़्रएल से थी।
39जहाँ तक साऊल की बेटी मीकल का ताल्लुक़ था साऊल ने उसे दाऊद से लेकर उस की दुबारा शादी फ़लतियेल बिन लैस से करवाई थी जो जल्लीम का रहनेवाला था।