1ऐ ख़ुदावन्द! अपना कान झुका और मुझे जवाब दे,
2मेरी जान की हिफ़ाज़त कर, क्यूँकि मैं दीनदार हूँ,
3या रब्ब, मुझ पर रहम कर,
4या रब्ब, अपने बन्दे की जान को ख़ुश कर दे,
5इसलिए कि तू या रब्ब, नेक और मु'आफ़ करने को तैयार है,
6ऐ ख़ुदावन्द, मेरी दुआ पर कान लगा,
7मैं अपनी मुसीबत के दिन तुझ से दुआ करूँगा,
8या रब्ब, मा'मूदों में तुझ सा कोई नहीं,
9या रब्ब, सब क़ौमें जिनको तूने बनाया,
10क्यूँकि तू बुजु़र्ग है और 'अजीब — ओ — ग़रीब काम करता है,
11ऐ ख़ुदावन्द, मुझ को अपनी राह की ता'लीम दे, मैं तेरी रास्ती में चलूँगा;
12या रब्ब! मेरे ख़ुदा, मैं पूरे दिल से तेरी ता'रीफ़ करूँगा;
13क्यूँकि मुझ पर तेरी बड़ी शफ़क़त है;
14ऐ ख़ुदा, मग़रूर मेरे ख़िलाफ़ उठे हैं,
15लेकिन तू या रब्ब, रहीम — ओ — करीम ख़ुदा है,
16मेरी तरफ़ मुतवज्जिह हो और मुझ पर रहम कर;
17मुझे भलाई का कोई निशान दिखा,